व्यापारियों ने खुद बनाई व्यवस्था — सक्ती ने लिखा अनुशासन का नया अध्याय, ‘सेल्फ क्लोज्ड सिटी’ की शुरुआत को मिला ऐतिहासिक समर्थन, पहला सोमवार रहा पूर्णतः बंद

व्यापारी बोले – “यह सिर्फ अवकाश नहीं, आत्मअनुशासन का प्रतीक है”
सक्ती। नगर में सोमवार को इतिहास रच गया। चैंबर ऑफ कॉमर्स की पहल पर पूरे सक्ती में पहली बार ‘सेल्फ क्लोज्ड सिटी’ की अवधारणा साकार हुई।
व्यापारियों के सामूहिक निर्णय से पूरा बाजार स्वेच्छा से बंद रहा। छोटे से लेकर बड़े दुकानदार तक ने इसमें भागीदारी निभाई और नगर को अनुशासन तथा एकजुटता का संदेश दिया।
विगत दिनों हुई चैंबर ऑफ कॉमर्स की बैठक में तय किया गया था कि हर सोमवार को नगर का बाजार स्वेच्छा से बंद रहेगा। न कोई प्रशासनिक आदेश, न कोई दवाब — सिर्फ आत्मसंकल्प और सामूहिक प्रतिबद्धता। सोमवार को इस निर्णय का प्रभाव साफ दिखा, जब पूरे नगर की दुकानें एक साथ बंद रहीं।
चैंबर अध्यक्ष मुकेश बंसल ने कहा —
“हम चाहते हैं कि सक्ती ऐसा शहर बने जो खुद अपना अनुशासन तय करे। यह बंद किसी विरोध या मजबूरी का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण की पहल है। व्यापारी वर्ग ने जिस तरह सहयोग दिया, वह सक्ती की सोच को नया आयाम देगा।”
पहला सोमवार बना मिसाल
सुबह से ही बस स्टैंड रोड, स्टेशन रोड, बुधवारी बाजार, गांधी चौक और कचहरी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में दुकानों के शटर बंद नजर आए। दूध, दवा और दैनिक आवश्यकताओं की दुकानों को छोड़कर लगभग सभी प्रतिष्ठान बंद रहे।
बाजारों में शांति और अनुशासन का ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया।
कपड़ा व्यापारी प्रकाश अग्रवाल ने कहा —
“आज पूरा शहर एक साथ बंद देखकर गर्व महसूस हुआ। यह व्यापारी वर्ग की ताकत और एकता का प्रमाण है।”
मोबाइल व्यवसायी आयुष देवांगन ने कहा —
“हर सोमवार ऐसे बंद से व्यापारियों को विश्राम और परिवार के साथ समय मिलेगा। यह कदम लंबे समय में लाभदायक साबित होगा।”
चैंबर प्रांतीय उपाध्यक्ष मनीष कथूरिया बोले —
“पहले अलग-अलग दिन दुकानों के बंद रहने से अव्यवस्था बनी रहती थी। अब पूरे शहर में एक समान बंद से अनुशासन की मिसाल कायम होगी।”
जनता ने भी सराहा पहल को
नगरवासियों ने व्यापारी वर्ग के इस सामूहिक निर्णय की सराहना की। उनका कहना था कि इससे न केवल बाजार में अनुशासन बनेगा, बल्कि नगर की यातायात और स्वच्छता व्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
स्थानीय नागरिक नीलम तिवारी ने कहा —
“व्यापारी वर्ग ने खुद अपने अनुशासन से जो उदाहरण दिया है, वह प्रशंसनीय है। यह शहर की सभ्यता का संकेत है।”
आगे की रूपरेखा तय
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस पहल को स्थायी बनाने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की घोषणा की है, जो सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक सोमवार को बंद का पालन पूरे नगर में समान रूप से हो। जो व्यापारी बिना कारण दुकानें खोलेंगे, उनसे संगठन स्तर पर चर्चा की जाएगी।
चैंबर ने कहा —
“यह केवल साप्ताहिक अवकाश नहीं, बल्कि ‘व्यापारी आत्मनियंत्रण आंदोलन’ की शुरुआत है।”
सक्रिय रही चैंबर की टीम
पहले दिन मॉनिटरिंग में सक्रिय रहे —
मुकेश बंसल, कैलाश खेतान, प्रकाश अग्रवाल, विक्की सूरजभान, मांगेराम अग्रवाल, सुनील कृपलानी, विकास, गोपाल गर्ग, पवन अग्रवाल, अतिश अग्रवाल, कैलाश पुष्पा अग्रवाल, राजू अग्रवाल, आयुष देवांगन, अजय देवांगन, राजेश क्षत्री, चंदन देवांगन, बिंना अग्रवाल, बेबू अठवानी, पंकज बंसल, हितेश साहू और सुभाष देवांगन।
सभी ने बाजार भ्रमण कर दुकानदारों से सहयोग के लिए आभार जताया।सक्ती बना उदाहरण
सक्ती बना उदाहरण
पहले सोमवार को मिली सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि व्यापारी खुद अनुशासित हों, तो शहर किसी आदेश का मोहताज नहीं होता। ‘सेल्फ क्लोज्ड सिटी’ का यह पहला कदम आने वाले दिनों में सक्ती को प्रदेश के सबसे संगठित नगरों की सूची में शामिल कर सकता है।




