सक्ती जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर टकराव—हड़ताल जारी या समाप्त? दोनों पक्षों (प्रशासन और कर्मचारियों) के दावे आमने-सामने

सक्ती। सहकारी कर्मचारी संघ एवं धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सक्ती जिले में धान खरीदी व्यवस्था गंभीर संकट में बनी हुई है। जहाँ कर्मचारी संगठन लगातार यह दावा कर रहे हैं कि हड़ताल पूरी मजबूती से जारी है, वहीं जिला प्रशासन ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया है कि कई कर्मचारी हड़ताल से वापस लौट आए हैं और कार्य शुरू करने की सहमति दे चुके हैं।
इस विरोधाभाषी स्थिति ने किसानों, समितियों एवं प्रशासनिक मशीनरी के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है।
कर्मचारी संगठनों का दावा — “हड़ताल पूरी ताकत से जारी, किसी भी स्तर पर नहीं टूटी”
सहकारी कर्मचारी संघ एवं धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ का कहना है कि—
शासन की गलत व कर्मचारी-विरोधी नीतियों के कारण हड़ताल जारी है।
12 माह कार्य के बदले केवल 6 माह वेतन जैसी नीति आर्थिक शोषण है।
धान खरीदी व्यवस्था “प्रशासन की लापरवाही” के कारण चरमराई।
जब तक नियमितीकरण, 12 माह वेतन, प्रबंधन अनुदान 3 लाख, 50% भर्ती में सुधार तथा अन्य मांगों पर लिखित समाधान नहीं मिलता, हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
संघ के पदाधिकारियों—एकलव्य चंद्रा एवं पुरुषोत्तम बरेठ—ने बताया कि शासन एवं प्रशासन के दावे भ्रामक हैं और कर्मचारियों का बड़ा समूह आज भी हड़ताल पर है।
प्रशासन का बड़ा दावा — “कई कर्मचारी हड़ताल छोड़कर लौटे, धान खरीदी की तैयारी शुरू”
कार्यालय सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सक्ती द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार—
प्रभारी सचिव (जिला सक्ती) एवं MARKFED प्रबंध संचालक की उपस्थिति में धान खरीदी व्यवस्था की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में धान खरीदी की प्रारंभिक तैयारी, कर्मचारियों की उपलब्धता तथा हड़ताल की स्थिति की समीक्षा की गई।
प्रशासन का दावा है कि कई सहकारी समिति कर्मचारियों ने शासन की धान उपार्जन नीति 2025-26 के तहत कार्य करने की सहमति दे दी है।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई चर्चा के बाद
21 सहकारी समितियों के 42 कर्मचारियों ने हड़ताल से वापसी का पत्र सौंपा
19 नवंबर 2025 से केंद्रों में उपस्थित होकर धान खरीदी कार्य करने की सहमति दी है। प्रशासन ने इसे हड़ताल समाप्त होने की दिशा में सकारात्मक प्रगति बताया है।
जमीनी स्थिति—दावा बनाम हकीकत में उलझा धान खरीदी कार्य दोनों पक्षों के दावों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है—
कई केंद्रों में अभी भी कर्मचारी पूरी तरह उपस्थित नहीं हैं।कुछ समितियों में कर्मचारियों की आंशिक वापसी की सूचना है। किसान असमंजस की स्थिति में हैं क्योंकि आधिकारिक रूप से खरीदी प्रारंभ की तारीख नजदीक है लेकिन स्टाफ उपलब्धता अधूरी। प्रशासन व्यवस्था सामान्य होने के दावे कर रहा है, जबकि संगठन अभी भी पूर्ण हड़ताल की बात दोहरा रहे हैं।
कर्मचारी संघों का पलटवार — “42 कर्मचारियों की वापसी का दावा भ्रम फैलाने वाला”
कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन के दावे को खारिज करते हुए कहा—
“कुछ कर्मचारियों के पत्र को आधार बनाकर हड़ताल समाप्त बताना गलत है।” “बहुमत कर्मचारी संयुक्त रूप से हड़ताल पर डटे हुए हैं। ”“शासन यदि लिखित समाधान नहीं देगा, तो आंदोलन और तेज होगा।”
किसानों की चिंता—खरीदी व्यवस्था कहीं ठप न पड़ जाए
किसानों ने प्रशासन और कर्मचारियों दोनों से अपील की है कि धान खरीदी जैसे संवेदनशील और समयबद्ध कार्य को लेकर असमंजस जल्द दूर किया जाए।
किसानों का कहना है—
देर होने पर धान खराब होने का खतरा,
परिवहन लागत बढ़ने की आशंका,
और खरीदी प्रक्रिया अटकने के भय के कारण स्थिति चिंताजनक है।
नतीजा — जिले में धान खरीदी पर अनिश्चितता कायम
दोनों पक्षों के आमने-सामने दावों के बीच वास्तविक स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
जहाँ प्रशासन हड़ताल समाप्त होने की बात कर रहा है, वहीं कर्मचारी संगठन हड़ताल जारी रहने का दावा कर रहे हैं।
जिले की धान खरीदी व्यवस्था इसी असमंजस के बीच खड़ी है और अंतिम निर्णय या समाधान आने तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रहने की संभावना है।




