रजिस्ट्री पर ब्रेक: आदेश न पहुंचने से प्रदेश के पंजीयन कार्यालय सूने पड़े

बिलासपुर। प्रदेश में अचल संपत्ति की सरकारी गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के बाद रजिस्ट्री कार्य लगभग ठप हो गया है। नई दरों का आदेश जिले तक नहीं पहुंचने से पंजीयन कार्यालयों में दिनभर सन्नाटा रहा। जहां पहले प्रतिदिन 160 से 180 रजिस्ट्री होती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 30 से 40 तक सिमट गई है।
नई गाइडलाइन ने बढ़ाई परेशानी
सरकारी गाइडलाइन दरों में 20 गुना तक वृद्धि किए जाने के बाद जमीन, मकान और प्लॉट की रजिस्ट्री महंगी हो गई है। रजिस्ट्री महंगी होने से खरीदी–फरोख्त पर सीधा असर पड़ा है और आम नागरिक परेशान हैं।
रियल स्टेट कारोबार पर सीधा असर
रियल स्टेट व्यवसायियों ने बताया कि नई दरें लागू करते समय ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो बाजार की परिस्थितियों का अध्ययन ही नहीं किया गया। इससे बिकवाली रुक गई है और निर्माण कार्य भी प्रभावित होने लगा है।
आदेश न पहुंचने से काम ठप
जिले के पंजीयन कार्यालयों तक नए संशोधित आदेश नहीं पहुंच पाए हैं। पुराने मूल्य लागू नहीं हो सकते और नए आदेश उपलब्ध न होने से अधिकारी रजिस्ट्री करने में असमर्थ हैं। नतीजा यह हुआ कि पूरे प्रदेश में पंजीयन कार्यालय खाली पड़े रहे।
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गाइडलाइन दरों में हुई बढ़ोतरी (उदाहरण के अनुसार)
क्षेत्रफल (वर्गफुट) पहले रजिस्ट्री अब रजिस्ट्री
1000 ₹52,500 ₹5,25,000
1200 ₹63,000 ₹6,30,000
2000 ₹1,05,000 ₹10,50,000
2400 ₹1,26,000 ₹12,60,000
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एक ही जमीन की दो अलग–अलग दरें
मामले ने और भ्रम तब बढ़ाया जब रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) पोर्टल और पंजीयन विभाग की गाइडलाइन दरों में फर्क सामने आया। दोनों विभागों की दरें अलग होने के कारण लोगों को समझ नहीं आ रहा कि किस दर पर रजिस्ट्री होगी।
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निष्कर्ष
गाइडलाइन की नई दरों ने रजिस्ट्री कार्य को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। आदेश जल्द नहीं पहुंचे तो आने वाले दिनों में बाजार और अधिक धीमा पड़ सकता है।




