फिर अनसुनी रह गई सक्ती की जनता की आवाज: जेठा में ही होगा गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन, शहर के बीच मैदान में आयोजन की मांग पर प्रशासन ने फेर लिया मुंह

सक्ती। जिले में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के आयोजन को लेकर इस बार भी प्रशासनिक निर्णय पर जनभावनाएं भारी नहीं पड़ सकीं। लगातार उठती मांगों, जनप्रतिनिधियों के प्रयास और आम नागरिकों की अपेक्षाओं के बावजूद जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह इस वर्ष भी जेठा में ही आयोजित किया जाएगा। आयोजन स्थल को लेकर प्रशासन के इस फैसले से नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में निराशा और असंतोष का माहौल है। दरअसल, नगरवासियों की लंबे समय से यह मांग रही है कि गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह शहर के बीच स्थित मैदान में आयोजित किया जाए, जो आमजन की पहुंच में हो।
सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी :-
नागरिकों का कहना है कि शहर के मध्य स्थित मैदान में आयोजन होने से बुजुर्गों, महिलाओं, स्कूली बच्चों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी। वहीं 10 किलोमीटर दूर स्थित जेठा में आयोजन होने से बड़ी संख्या में लोग केवल दूरी और परिवहन की समस्या के कारण शामिल नहीं हो पाते। इस जनभावना को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल एवं भाजपा नेता चिराग अग्रवाल ने हाल ही में जिले के कलेक्टर एवं जिले के प्रभारी मंत्री खुशवंत साहेब से मुलाकात कर औपचारिक रूप से आयोजन स्थल परिवर्तन की मांग रखी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि गणतंत्र दिवस केवल शासकीय औपचारिकता नहीं, बल्कि जनसामान्य की भागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय उत्सव है, इसलिए आयोजन स्थल ऐसा होना चाहिए, जहां अधिकतम नागरिक आसानी से पहुंच सकें।
मांग को लेकर व्यापारिक और सामाजिक संगठनों में थी सहमति:-
बताया जाता है कि इस मांग को लेकर व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं आम नागरिकों में भी सहमति थी। इसके बावजूद प्रशासन ने किसी प्रकार का संशोधन नहीं करते हुए आयोजन स्थल को यथावत जेठा ही रखने का निर्णय लिया। प्रशासनिक निर्णय सामने आते ही नगर में मायूसी छा गई है।
शहर के बीच भी सारी सुविधाएं उपलब्ध, फिर भी नजरअंदाज :-
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बीच स्थित मैदान में सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं के दृष्टिकोण से भी वहां आयोजन पूरी तरह संभव है। इसके बावजूद हर वर्ष जिला मुख्यालय से दूर समारोह आयोजित करना समझ से परे है। नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णय जनता को गणतंत्र दिवस जैसे पर्व से जोड़ने के बजाय, उन्हें उससे दूर करने वाले साबित हो रहे हैं।
मुद्दा केवल आयोजन स्थल का नहीं, जनता के सम्मान से जुड़ा है :-
नगरवासियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मुद्दा केवल आयोजन स्थल का नहीं, बल्कि जनसहभागिता, लोकतांत्रिक भावना और जनता के सम्मान से जुड़ा हुआ है। बार-बार उठाई जा रही मांगों को अनसुना किया जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
अब आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले वर्षों में प्रशासन जनभावनाओं को प्राथमिकता देगा या फिर जिला स्तरीय राष्ट्रीय आयोजन सीमित वर्ग और स्थान तक ही सिमट कर रह जाएंगे।
“गणतंत्र दिवस केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम जनता की सहभागिता से जुड़ा राष्ट्रीय पर्व है। हमारी स्पष्ट मांग थी कि आयोजन शहर के बीच स्थित मैदान में किया जाए, ताकि हर वर्ग का नागरिक सहजता से शामिल हो सके। जेठा 10 किलोमीटर दूर है, जहां पहुंचना बुजुर्गों, महिलाओं और विद्यार्थियों के लिए कठिन होता है। इसलिए सक्ती शहर में आयोजन को लेकर मांग की गई थी।
श्याम सुंदर अग्रवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, सक्ती
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कलेक्टर से चर्चा की गई थी कि गणतंत्र दिवस का जिला स्तरीय समारोह शहर के बीच स्थित मैदान में आयोजित किया जाए, ताकि आम जनता की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके। यह मांग किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे नगर की थी। लोकतंत्र में जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए।”
चिराग अग्रवाल
भाजपा नेता, सक्ती




