सक्ती नगर

क्या अब जर्जर सड़कों से होगी सक्ती जिले की पहचान ?

हजारों गड्ढों को पार कर स्कूल जाने की चुनौती

आख़िर कब जागेगा प्रशासन

सक्ती– लोगों के जेहन में एक सवाल दौड़ रहा है कि क्या अब जर्जर सड़कें सक्ती जिले की पहचान बनने वाली हैं? नगर से होकर गुजरने वाले पुराने नेशनल हाइवे की दशा इन दिनों बद से बदतर हो गई है। गड्ढे में तब्दील यह मार्ग रोजाना दुर्घटना को आमंत्रित कर रहा है। इस पथ पर यात्रा करना जान को जोखिम में डालना है। छोटे चक्के के वाहनों को तो इस पथ पर चलना दूभर है। सबसे बड़ी विडंबना यह हे कि इस मार्ग से सैंकडों विद्यालयीन छात्र छात्राएं आवागमन करते हैं। कई बार तो बड़ी दुर्घटनाएं भी हो जाती है।

नगर पालिका का दावा डाली गई थी मुरूम

इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है हालांकि नगर पालिका दावा कर रही है कि बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं नगर पालिका द्वारा मुरूम पाटी गई है लेकिन वह अपर्याप्त है। विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। विदित हो कि नया एन एच बाइपास प्रारंभ होने के बाद से इस मार्ग की ओर विभाग का बिलकुल ध्यान नहीं गया। जब इस एनएच रोड से विशालकार्य वाहन चलते थे तब उन्होनें इस पथ को पूरी तरह उखाड़ दिया है।

आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं नागरिक

बरसात के दिनों में हालत इतनी अधिक खराब है कि जल्द से जल्द यदि इस ओर पहल नहीं की जाती है तो नगारिक तथा मोहल्लेवासी आंदोलन की राह पकड़ेंगे। बाराद्वारा रोड पेट्रोल पंप के पास से मसनिया तक 7 किलोमीटर इस पथ पर पैदल चलना तक मुश्किल है। सड़क के जर्जर रहने के कारण इस पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। वाहनों में टूट-फूट होने के कारण वाहन मालिकों का भी भारी नुकसान हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी सरस्वती शिशु मंदिर, अनुनय कान्वेंट, जेबीडीएव्ही, ब्लू बेल जैसे स्कूल के सैंकड़ों विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है। बारिश आते ही यह रोड जानलेवा साबित हो रही है।

बड़े बड़े गड्ढों से होता है इस मार्ग में स्वागत

क्या कहते हैं नागरिक-

नागरिकों  का कहना है कि एनएच 49 का यह पुराना पथ नगर के लिए महत्वपूर्ण पथ है। इस पथ के अंतर्गत नगर के कई वार्ड आते हैं। मोहल्ले के लोगों को बरसात में बड़े बड़े गड्ढो से परेशानी होती है वहीं गर्मी के दिनों में धूल से परेशानी होती है। नगर पालिका अध्यक्ष सुषमा त्रिलोकचंद जायसवाल ने कहा कि नगर पालिका ने समस्या को देखते हुए मुरूम डलवाया था लेकिन वह भी नाकाफी है। इससे अधिक नगर पाालिका नही उलवा सक्ती। लोगों को राहत मिले इसके लिए विभागीय अधिकारियों से भी चर्चा की गई है। 

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