विधि विधान से पूजे गए भगवान विश्वकर्मा, वंदना ग्रुप में लगातार 44वें साल हुआ आयोजन

सक्ती। वंदना ग्रुप एवं इंजीनियरिंग में आज देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई। मूर्ति स्थापना कर विधि विधान से पूजा अर्चना पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। संस्था के कर्मचारियों की मौजूदगी में संगीत कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। साथ ही कर्मचारियों के लिए विभिन्न में प्रतिस्पर्धा का भी आयोजन हुआ। जिसमें कुर्सी दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

44 वर्षों से संस्था में पूजे जा रहे देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा –
वंदना ग्रुप एवं इंजीनियरिंग के डायरेक्टर त्रिलोक चंद जायसवाल ने बताया कि वर्ष 1978 से अर्थात विगत 44 वर्षों से लगातार संस्था में देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है एवं प्रसाद का वितरण किया जाता है। संस्था के कर्मचारियों के अलावा नगरवासी भी इस अवसर पर सम्मिलित होते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के संचालकों एवं मेहनतकस कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सुषमा त्रिलोक चंद जायसवाल ने कहा कि हिंदू धर्म में विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को शिल्प शास्त्री शिल्प प्रजापति भी कहा जाता है। इनकी महिमा का वर्णन वेदों और पुराणों में मिलता है।

भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है दुनिया का पहला इंजीनियर –
डायरेक्टर एवं शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष त्रिलोक चंद जायसवाल ने कहा कि आज 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती के मौके पर प्रतिवर्ष आयोजन होते हैं। भगवान विश्वकर्मा जी ने तकनीकी भाषा में दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर माना जाता है। माना जाता है कि विश्वकर्मा ने भवन ही नहीं बल्कि देवी-देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र का निर्माण भी किया था।





