सक्ती जिला

जिस पर लाखों के घोटाले व फर्जीवाड़े का आरोप उसे दे दी गई नए जिले में अहम जवाबदारी 

0 सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी के खिलाफ लंबित है जांच

0 ऐसी क्या है मजबूरी जो घोटालेबाजों को दी जा रही है पनाह ?

सक्ती– सहकारिता विभाग इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में हैं। सहकारी बैंक के जिले में नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय को बनाया गया है जिनके खिलाफ सहकारी बैंक डभरा के प्रबंधक रहने के दौरान घपले, घोटाले और फर्जी केसीसी के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ जांच लंबित है। 3 सदस्यीय जांच टीम का गठन भी हुआ था लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। सक्ती 9 सिंतबर को नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया है और अश्वनी पाण्डेय को नए जिले के सहकारी बैंक का नोडल अधिकारी बना दिया गया। उनकी नियुक्ति के बाद से कई प्रकार के सवालिया निशान उठ रहे हैं। जिले में बहुत से ऐसे लोगों को धान खरीदी का जिम्मा नोडल अधिकारी ने सौंपा जिन पर भी बहुत सी गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। विदित हो कि सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी के रूप में इस वर्ष अश्वनी पाण्डेय के पास सक्ती जिले के साथ साथ जांजगीर चांपा जिले का भी प्रभार है। जबकि विभाग में और भी ऐसे पात्र लोग हैं जिनको नोडल बनाया जा सकता था लेकिन उन्हें ही दोनों जिलों की जिम्मेदारी देना विभागीय कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। 

बरसों से जिले में पदस्थ, कई लाखों के घोटाले का आरोप- 

नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय बहुत वर्षों से जिले में पदस्थ हैं। वे डभरा सहकारी बैंक के ब्रांच मैनेजर रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में कर्मचारियों के साथ मिलकर समिति में गबन, फर्जी केसीसी, धोखाधड़ी करने की शिकायत मिली थी। सुपरवाइजर के विरूद्ध फर्जी केसीसी राशि लगभग 3 लाख, खाद बीज का समायोजन पौने पांच लाख गबन किए जाने संबंधी शिकायत की जांच कई माह से लंबित है। 

संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर ने किया था जांच टीम का गठन- 

घपले घोटाले की जांच करने के लिए संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर ने जांच टीम का गठन किया था। जिसकी अध्यक्ष सुश्री डॉ. उषा ध्रुव, सदस्य आरडी धृतलहरे, आरसी ध्रुव को बनाया गया था। लेकिन एक माह पूर्व सहायक पंजीयक उषा ध्रुव का स्थानांतरण हो गया है। अब यह जांच अधर में लटकी हुई है। अब देखना लाजमी है कि दागदार कर्मचारियों पर विभागीय डण्डा चलता है या वे अपने प्रभाव से बच निकलने में कामयाब होते हैं। 

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जिन अधिकारियों को जाँच की जवाबदारी मिली थी उस टीम के अध्यक्ष का स्थानांतरण होने की वजह से प्रतिवेदन नहीं दिया जा सका है। उच्चाधिकारी उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति करेंगे उसके बाद ही आगे की कार्यवाही हो सकेगी। 

आर.डी. धृतलहरे

जाँच टीम के सदस्य एवं अंकेक्षण अधिकारी, सहकारी संस्थाएँ

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