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209 सागौन पेड़ कटाई प्रकरण में धीमी जांच से असमंजस, मंत्री खुशवंत साहेब ने जताई नाराज़गी

सक्ती। डूमरपारा क्षेत्र में एमआरएस मिनरल्स कंपनी द्वारा 209 सागौन पेड़ों की अवैध कटाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस गंभीर पर्यावरणीय प्रकरण की जांच वन विभाग द्वारा की जा रही है, किंतु जांच की गति बेहद धीमी होने से अब असमंजस की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा बिना वैध अनुमति के सागौन के पेड़ों की कटाई की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आने के बावजूद कार्रवाई केवल औपचारिक स्तर तक सीमित रही। वन विभाग द्वारा काटे गए पेड़ों को जब्त करने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

मंत्री खुशवंत साहेब ने जताई नाराज़गी
जिला प्रभारी मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने हाल ही में हुई जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि “पर्यावरण से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं, तो दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।”

जांच में देरी से असमंजस बढ़ा

वन विभाग द्वारा जांच लंबित रखे जाने के कारण अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोष किस स्तर पर हुआ — कंपनी की लापरवाही या प्रशासनिक शिथिलता के चलते। इस स्थिति में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच भ्रम और असमंजस बढ़ गया है।

सरकार का स्पष्ट संदेश – पर्यावरण से समझौता नहीं

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सागौन जैसे मूल्यवान वृक्षों की अवैध कटाई किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित किया है कि जांच शीघ्र पूर्ण कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

जनता की निगाहें वन विभाग पर
अब जिले की जनता की निगाहें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं। सवाल यह है कि— जब पेड़ों की जब्ती तक कार्रवाई हो चुकी है, तो आगे की जांच में देरी क्यों? क्या मंत्री के निर्देश के बाद इस बार वास्तविक कार्रवाई होगी? इसी असमंजस के बीच पूरा जिला इस बहुचर्चित प्रकरण के निष्कर्ष का इंतजार कर रहा है।

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