धान खरीदी पर हड़ताल की छाया — कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले को दिया मोर्चा, कर्मचारियों के विरोध से प्रभावित हो सकती है खरीदी प्रक्रिया, किसान असमंजस में

सक्ती। जिले में 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ होनी है, लेकिन सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्थिति असमंजस भरी बनी हुई है। समितियों में आवश्यक तैयारियाँ अधूरी हैं और किसानों में बेचैनी बढ़ती जा रही है।
हड़ताल की वजह से बारदाना वितरण, तौल कांटा परीक्षण, रजिस्टर अद्यतन और साफ-सफाई जैसे बुनियादी कार्य ठप हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक तैयारियाँ कागजों में हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर खरीदी केंद्रों में अभी सन्नाटा पसरा हुआ है।
ऐसे में सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने पहल करते हुए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की सूची जारी की है, जिनको अलग-अलग धान खरीदी केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि “धान खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए, चाहे समिति कर्मचारी हड़ताल पर ही क्यों न हों। प्रशासन पूरी तरह तैयार है।”
हालांकि, समिति कर्मचारियों ने प्रशासनिक निर्णय का कड़ा विरोध किया है।
सेवा सहकारी समिति कर्मचारी संघ सक्ती जिला के जिलाध्यक्ष एकलव्य चन्द्रा ने कहा कि “हमारी मांगें वर्षों से लंबित हैं। सरकार लगातार अनदेखी कर रही है। हम किसी के विरोधी नहीं हैं, पर बिना हमारी मांगें माने हमें कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। प्रशासन चाहे जो व्यवस्था कर ले, स्थायी समाधान केवल कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण से ही संभव है।”
उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारी आंदोलन के पक्ष में हैं और तब तक हड़ताल जारी रहेगी जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती।
इस बीच, किसानों में गहरी चिंता है — खेतों में कटकर तैयार फसल पड़ी है, लेकिन खरीदी की व्यवस्था पर संशय बना हुआ है। यदि हड़ताल नहीं टूटी तो पहले ही दिन से खरीदी कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
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