सक्ती जिला: ग्राम पंचायत सचिवों को बनाया धान खरीदी प्रभारी, कुछ केंद्रों पर अधिकारियों की नियुक्ति, कलेक्टर के फरमान के बाद अब धान खरीदी कैसे होगी, बना यक्ष प्रश्न

सहकारी समिति कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, वापसी की नहीं दिख रही गुंजाइश, सक्ती जिले में धान खरीदी का काउंटडाउन शुरू, 15 नवंबर से खुलेगी खरीदी केंद्रों की तिजोरी
सक्ती। धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन खरीदी व्यवस्था को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। सहकारी समिति कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते प्रशासन ने अब ग्राम पंचायत सचिवों को खरीदी केंद्रों का प्रभारी बना दिया है। वहीं, कुछ केंद्रों पर तहसीलदारों और विभागीय अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं। ऐसे में खरीदी संचालन का पूरा दारोमदार पंचायत सचिवों पर आ गया है। सचिव पहले से ही पंचायत के विकास, जनकल्याण और चुनावी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे यह जिम्मेदारी उनके लिए भारी साबित हो सकती है।

कलेक्टर के आदेश के अनुसार सचिवों को खरीदी केंद्रों के संचालन, तौल, पंजीयन, परिवहन और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। किसानों का कहना है कि अनुभवी समिति कर्मचारियों के अभाव में खरीदी व्यवस्था सुचारु रह पाना कठिन दिख रहा है। कई किसानों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले, तो खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था और देरी की स्थिति बन सकती है।

15 नवंबर से जिले में धान खरीदी शुरू होनी है। प्रशासन का कहना है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, लेकिन सचिवों को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी के बीच खरीदी का सुचारु संचालन इस बार एक बड़ी चुनौती बन गया है।

हड़ताल का असर — किसानों की चिंता, प्रशासन की चुनौती
1. सहकारी समिति कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, समाधान की संभावना नहीं
जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख समितियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। शासन-प्रशासन से बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। कर्मचारियों की वापसी की संभावना नगण्य दिख रही है, जिससे खरीदी व्यवस्था सीधे प्रभावित हो रही है।
2. खरीदी केंद्रों पर सचिवों को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी
सहकारी कर्मचारियों की अनुपस्थिति में प्रशासन ने ग्राम पंचायत सचिवों को खरीदी केंद्रों का प्रभारी बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था की है। सचिवों को पंजीयन, तौल, भुगतान और परिवहन सहित संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। यह पहली बार है जब पंचायत स्तर के कर्मचारियों को इतने बड़े पैमाने पर खरीदी संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
3. अनुभव की कमी और दोहरी ड्यूटी से कार्यप्रणाली पर सवाल
पंचायत सचिव पहले से ही विकास और जनकल्याण कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में धान खरीदी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को संभालना चुनौतीपूर्ण होगा। अनुभव की कमी और समयाभाव के कारण खरीदी की पारदर्शिता और गति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
4. किसान बोले — “अगर खरीदी में देरी हुई, तो नुकसान हमें झेलना पड़ेगा”
किसानों ने कहा कि उन्होंने धान की कटाई-मड़ाई पूरी कर ली है और खरीदी केंद्रों पर बेचने की तैयारी में हैं, लेकिन व्यवस्था स्पष्ट न होने से वे चिंतित हैं। उनका कहना है कि खरीदी में देरी या गड़बड़ी का सीधा नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ेगा।
5. प्रशासन सतर्क, वैकल्पिक व्यवस्था पर लगातार मंथन जारी
प्रशासन ने सचिवों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं और प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू की है। कलेक्टर कार्यालय से खरीदी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी केंद्र पर अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि सभी केंद्रों पर खरीदी प्रक्रिया तय समय पर शुरू होगी।




