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सक्ती जिले में बड़ा खेल : पटवारी और भूमाफियाओं की मिलीभगत, कलेक्टोरेट से सटी शासकीय भूमि पर अवैध खरीद–फरोख्त का खेल उजागर

  • गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की

सक्ती। जिले में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, कूट–रचना और खरीद–फरोख्त का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों ने कलेक्टर सक्ती को ज्ञापन सौंपकर कलेक्टोरेट परिसर से लगी बहुमूल्य शासकीय भूमि को भूमाफियाओं से मुक्त कराने तथा राजस्व विभाग में चल रही अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि शासकीय जमीनों को बचाने के लिए प्रशासन को अब कड़ा और पारदर्शी रुख अपनाना होगा।

12 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप –

ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम सकरेली (बाराद्वार) के खसरा नंबर 1311/1, 1311/2, 1311/3, 1311/4 एवं 1311/5 मिलाकर 12 एकड़ से अधिक भूमि शासकीय मद में दर्ज है। यह भूमि कलेक्टर कार्यालय से सटी है एवं नेशनल हाईवे से जुड़ाव होने के कारण प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ जमीन दलाल इस शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा जमाने के साथ-साथ इसे टुकड़ों में बेचने का प्रयास कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण है।

नया जिला होने से भूमि का और अधिक महत्व –

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कहा कि सक्ती जिले के नवीन गठन के बाद शासकीय कार्यालयों, विभागीय भवनों, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशासनिक विस्तार के लिए बड़े भू-खंडों की आवश्यकता है।

ऐसे में कलेक्टोरेट से लगी यह भूमि शासकीय उपयोग के लिए अत्यंत उपयुक्त है और इसे भूमाफियाओं व दलालों से तत्काल मुक्त कराया जाना चाहिए।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की शिकायत

5 दिसंबर को उप-पंजीयक की सतर्कता से बची एक शासकीय भूमि –

इस पूरे विवाद के बीच एक बड़ा मामला 5 दिसंबर 2025 को उप-पंजीयक कार्यालय में तब सामने आया, जब राजस्व दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि खरीदी–फरोख्त की प्रक्रिया में लाई गई भूमि वास्तव में शासकीय मद में दर्ज है। उप-पंजीयक की समझदारी और दस्तावेज़ों की गहन जानकारी के चलते यह सौदा रोक दिया गया, जिससे शासकीय भूमि बिकने से बच गई।

पटवारी द्वारा ‘बिक्री छांट’ जारी—कूट–रचना का गंभीर आरोप –

कलेक्टर कार्यालय के सामने स्थित ग्राम सकरेली के खसरा नंबर 1311 को लेकर सबसे गंभीर बात यह है कि इसका बंटाकन कर 1311/4 का बिक्री छांट पटवारी द्वारा जारी कर दिया गया। यह तथ्य स्वयं सिद्ध करता है कि राजस्व अभिलेखों में कुटरचना कर शासकीय भूमि को निजी हाथों में पहुंचाने का प्रयास हो रहा था।

शासकीय भूमि चार हिस्सों में कैसे बाँटी गई? –

राजस्व नियमों के अनुसार—
शासकीय मद की भूमि का बंटवारा नहीं किया जाता, यदि किसी विशेष परिस्थिति में करना पड़े, तो कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य है। लेकिन खसरा 1311 को 1311/1, 1311/2, 1311/3 और 1311/4 में कैसे बांट दिया गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद पटवारी द्वारा 1311/4 की बिक्री छांट जारी करना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

राजस्व विभाग सवालों के घेरे में –

इन घटनाओं के सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कहा कि यदि विभाग के कुछ कर्मचारी ही कूट–रचना में शामिल हो जाएँ, तो भूमाफिया बेखौफ होकर सरकारी जमीनें हथिया लेंगे। इसलिए दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कलेक्टर से त्वरित कार्रवाई की मांग –

पार्टी पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की— कलेक्टोरेट से सटी संपूर्ण शासकीय भूमि को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाए, जिम्मेदार राजस्व कर्मचारियों(पटवारी) के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। सभी शासकीय भूमि की विशेष जांच कराई जाए और अवैध खरीद–फरोख्त पर रोक लगाने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो शासकीय संपत्ति को भारी नुकसान होगा और भूमाफिया और अधिक सक्रिय हो जाएंगे। ऐसा नहीं होगा तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

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