बेजुबानों को बचानें अथक मेहनत कर रहे युवा, कड़ी धूप हो या रात का अंधेरा पता चलते ही पहुंचकर कराते हैं इलाज

- सेवा भावना की अनूठी मिसाल पेश की गौ सेवा समिति के युवाओं ने
सुमित शर्मा/सक्ती – गौ वंशों को बचाने का अभियान निरंतर गति पकड़ रहा है। गौ सेवा समिति के युवा सदस्यों की मेहनत लगातार रंग ला रही है। कड़ी धूप में यदि 10 से 15 किलोमीटर दूर भी इस बात का पता चल जाए कि वहां कोई गौ वंश या बेजुबान बीमार है या दुर्घटनाग्रस्त हैं तो समिति के युवा पहुंचने में जरा भी देर नहीं करते और उनकी मन लगाकर सेवा करते हैं। ऐसे कई मामले नगर में आए दिन देखने को मिल रहे हैं जब गौ सेवा समिति के सदस्य लगातार दिन हो सुबह, रात हो या शाम हो कभी भी पता चलने के बाद तत्काल वहां पर पहुंचकर इलाज कराते हैं साथ ही हर संभव कोशिश करते हैं कि गौवंश की जान बच जाए।

युवाओं के सराहनीय काम को देखते हुए कई संगठनों के द्वारा हाल ही में उन्हें सम्मानित भी किया गया था।
बीते कुछ दिनों की यदि बात की जाए तो बीते दिनों रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 2 साइड में खोदी गई नाली में एक गौ वंश गिर गई थी इसका रेस्क्यू किया गया था। इसी प्रकार अज्ञात वाहन की ठोकर से एक गोवंश का पैर कुचल गया था जिसकी सूचना मिलते ही सक्रिय सदस्य घटनास्थल पहुंचे और घायल का इलाज कराया और उसके खाने-पीने का इंतजाम किया। ऐसा ही वाकया शनि मंदिर के सामने अड़भार रोड टेमर में देखने को मिला जिसके बाद फिर तत्काल सारे सदस्य पहुंचकर इलाज करने भीड़ गए। केवल इलाज करने तक ही सीमित नहीं रहते इनका निरंतर देखरेख करने का काम भी गौ सेवा समिति के सदस्य करते हैं।

आधा दर्जन कुत्तों ने बछड़े को कर दिया था काटकर घायल, निरंतर सेवा से हुआ ठीक-
हाल ही में घटना सामने आई थी कि सब्जी मंडी के पास एक बछड़े को कुत्ते ने काट कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके बाद तत्काल युवा सदस्यों ने मिलकर उसका इलाज कराया इतना ही नहीं उसके देखरेख करने का भी पुख्ता इंतजाम कराया गया।

लगातार उसकी देखरेख की गई और उसकी जान बचाई गई और अब वह खतरे से बाहर है। राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी के जिला अध्यक्ष एवं गौ सेवा समिति के संस्थापक मयंक सिंह ने बताया कि बेजुबानो एवं गौ वंशियों को बचाने के लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं साथ ही उनकी टीम के सभी युवा साथी लगातार मेहनत कर रहे हैं और गौ वंशीय पशुओं को बचाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।

बिछड़े बंदर का रेस्क्यू कर इलाज कराया और पहुंचाया बिलासपुर के जीव आश्रय-
ऐसा नहीं है कि समिति के सदस्य अपनी जान से नहीं खेलते है। खतरों के बीच लगातार काम करते हैं। हाल ही में मालखरौदा ब्लाक से एक मामला सामने आया था एक व्यक्ति के घर एक बंदर दो दिनों से अपने समूह से बिछड़ने के बाद गुमशुम सा बैठा हुआ था। जिसकी सूचना वन विभाग को दी गई थी लेकिन कोई सफलता नहीं मिली तो समिति के मयंक सिंह, अनुराग चौबे, सोमेश सोनी सहित अन्य गौ सेवकों ने उसका रेस्क्यू किया और बिलासपुर स्थित निधि जीव आश्रय ले जाया गया। जहां बंदर का इलाज कराया गया।

निरंतर जुड़ रहा सेवादारों का कारवां, गौ सेवकों की अपील करें बेजुबानों की सेवा-
मयंक ने बताया कि लगातार युवाओं का कारवां जुड़ता जा रहा है और युवाओं के मन में भी सेवा भावना जागृत हो रही है। लगातार लोगों से मिल रहे प्रोत्साहन और उनसे उनका जुड़ाव हमें बेहतर करने के लिए प्रेरित कर रहा है। सभी लोगों से अपील की गई है कि गौवंशियों को कहीं भी कोई तकलीफ हो तो हमें सूचित कर सकते हैं साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वे भी सेवा भावना का परिचय देते हुए कहीं भी बेजुबानो को जरूरत हो तो वह सामने आकर उनकी सेवा करें।





