आदिवासी जमीन को सामान्य में रजिस्ट्री करने का मामला, कार्रवाई करने कांप रहे अधिकारियों के हाथ, कार्रवाई नहीं हुई तो होगा नगर बंद और कलेक्टोरेट घेराव

– गोड़वाना गणतंत्र पार्टी कर रही है आंदोलन, प्रशासन के कांनों में नहीं रेंग रही जूं
सक्ती। आदिवासी जमीन को सामान्य में रजिस्ट्री करने के मामले में जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे गोंगपा के नेता व कार्यकर्ताओं की बात पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे आक्रोश दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। अब पार्टी बहुत जल्द शहर बंद व कलेक्टोरेट का घेराव करेगी। धरना प्रदर्शन के 8 वें दिन गोंगपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह मरकाम पहुंचे और जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए जमकर आड़े हाथों लिया। मामला आदिवासी जमीन को सामान्य में रजिस्ट्री करने का है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को तीन बार सौंपे ज्ञापन के माध्यम से बताया है कि आदिवासी जमीन को बिना कलेक्टर की मंजूरी के सामान्य में रजिस्ट्री कर दी गई है. इसे लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारी लगातार लामबंद हैं और जगदीश बंसल तथा तत्कालीन उप पंजीयक प्रतीक खेमका के खिलाफ़ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
विदित हो कि आरोप लगा है कि जगदीश बंसल पिता- रामफल एवं तत्कालिन उप-पंजीयक प्रतीक खेमका के द्वारा षड़यंत्र करते हुए आदिवासी वर्ग के जमीन को सामान्य वर्ग के व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई है। जिसके बाद कलेक्टर ने उप पंजीयक को नोटिस तो दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद शिकायत पत्र दिया गया था. षड्यंत्रकारी लोगो के खिलाफ उचित जाँच करते हुए एफ. आई. आर. दर्ज करने की मांग की गई थी। पदाधिकारियों ने कहा कि उस आवेदन पर आज दिनांक तक किसी भी प्रकार का निर्णय अथवा कार्यवाही नही कि गई हैं. पार्टी नेताओं ने कहा कि कार्यवाही नही होने के कारण गोड़वाना गणतन्त्र पार्टी एवं आदिवासी समाज काफी क्षुब्ध है। कलेक्टर से मांग की गई है कि उक्त प्रकरण में यथा शीघ्र जाँच करें. अन्यथा आंदोलन और आगे बढ़ेगा। सक्ती नगर बंद तथा कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बहरहाल हड़ताल करते 9 दिन बीत चुके हैं लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है जिससे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओं सहित आदिवासी समाज के लोगों में भी आक्रोश बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
यह है मामला-
ज्ञात हो कि तत्कालीन उपपंजीयक प्रतीक खेमका और जगदीश बंसल द्वारा जिला दण्डाधिकारी के ज़मीन अनुमति वाले खारिज आदेश को अनुमति आदेश के रूप में नोट लिखते हुए कंचनपुर स्थित 12 डिसमिल आदिवासी ज़मीन की रजिस्ट्री मुख्तारनामा के आधार पर अपनी बहु के नाम जगदीश बंसल द्वारा खरीदी की गई। इसके बाद से ही गोंगपा के जिला पदाधिकारियों द्वारा इस संबंध में उचित कार्रवाई करने कलेक्टर को पत्र लिख रहे थे। इस संबंध में कलेक्टर द्वारा भी तत्कालीन उपपंजीयक को मामले में पत्र लिख जवाब मांगा था, लेकिन उपपंजीयक द्वारा कोई जवाब पेश नहीं किया गया। इसके बाद इस मामले में शासन स्तर पर पत्र व्यवहार की बात लगातार जिलाधीश द्वारा की जा रही है। इन सभी बातों से असंतुष्ट होते हुए गोंगपा के जिलापदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं ने 19 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
जिला प्रशासन पर बरसे गोंगपा के प्रदेश अध्यक्ष-
प्रदेश अध्यक्ष मरकाम ने कहा कि भूमाफिया जगदीश बंसल एक आदिवासी की ज़मीन को छल पूर्वक अपने जाति के अधिकारी के साथ सांठगांठ कर खरीद लेता है और यहां जिला प्रशासन मुखदर्शक बने बैठा हुआ है। आज संविधान दिवस है और इस अवसर पर अपने संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने जेठा कलेक्टर कार्यालय के सामने अपने साथियों के साथ बैठा हूं, लेकिन जिन्हें संविधान और क़ानून की रक्षा करनी चाहिए, ऐसे ज़िला अधिकारी और सत्ता में बैठे लोग संविधान की धज्जियां उड़ा रहें हैं। पत्रकारों को तुलेश्वर मरकाम ने बताया कि चूंकि सक्ती जिला कोरबा और रायगढ़ से लगा हुआ है और यहां आदिवासी समाज काफी अधिक संख्या में निवास करते हैं। यहां भी पांचवी अनुसूची क्षेत्र घोषित होना चाहिए। वहीं अगर जिला प्रशासन 10 दिवस के भीतर कार्रवाई नहीं करती है तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव और जिला बंद जैसे आंदोलन की ओर अग्रसर होगी। इस अवसर पर श्याम सिंह मरकाम, प्रभु जगत, कुलदीप मरकाम, बलवंत सिंह सिदार, जगर साय चौहान, भानु प्रताप चौहान, कीर्तन मारवी, जयसिंह मरकाम, कीर्तन लाल जगत सहित गोंगपा के कार्यकर्ता व छत्तीसगढ़ एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज यादव मौजूद थे।
आज भी आदिवासियों को हक के लिए पड़ रहा लड़ना-
गोंगपा राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह भी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज आजादी के इस अमृतकाल में भी हम आदिवासियों को आंदोलन करना पड़ रहा है। हमें कुछ सत्तासीन लोग आंदोलंजीवी कहते रहते हैं। हमें आंदोलन करने का कोई शौक नहीं है, लेकिन सरकारें हमें मजबूर करती हैं कि हम अपने समाज के हितों के लिए सड़कों पर उतरे और आंदोलन करें।




