सक्ती जिला

“नवाचार से निखरी शिक्षा: अड़भार की शिक्षिका किरण कटकवार को मिला राज्य अलंकरण विवेकानंद सम्मान 2025”

सक्ती/अड़भार।
शिक्षा में नवाचार और प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयोग कर रही शासकीय पूर्व कन्या माध्यमिक विद्यालय अड़भार (ब्लॉक मालखरौदा, जिला सक्ती) की शिक्षिका किरण कटकवार को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य अलंकरण विवेकानंद सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान समारोह प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा, छत्तीसगढ़ द्वारा 8 सितंबर 2025 को धमतरी जिले के प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, अकादमिक भवन, राखी मोड़ (चरमुड़िया), कुरूद में आयोजित किया गया। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस गरिमामय आयोजन में शिक्षा, विज्ञान, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं, समाजसेवकों एवं 10 बाल वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।

🔹 किरण कटकवार की प्रमुख उपलब्धियाँ

NMMSE परीक्षा में बच्चों का सतत चयन सुनिश्चित करना।

प्रकृति शिक्षण की पहल से छात्रों को पर्यावरण व विज्ञान से जोड़ना।

विद्यालय में विज्ञान किचन गार्डन की स्थापना।

शासकीय स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं को बढ़ावा देने के अभिनव प्रयोग।


इन्हीं कार्यों के कारण उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ।

🔹 समारोह की विशेषताएँ

सम्मानित शिक्षकों का मंच पर विशेष आसन देकर पारंपरिक रूप से दूध मिश्रित जल से चरण प्रक्षालन किया गया। इसके बाद तिलक-चंदन, महाआरती, मेडल, मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया।

विशेष अतिथि पद्मश्री अजय मंडावी ने कहा— “शिक्षक वही है जो समाज के लिए सच्चे इंसान गढ़ता है।”
वहीं मुख्य अतिथि डा. हित नारायण टंडन ने इस सम्मान को शिक्षकों के लिए जीवनभर प्रेरणादायी बताया।

🔹 गरिमामय उपस्थिति

इस अवसर पर शिक्षा और विज्ञान क्षेत्र के विशेषज्ञ कालिदास नाकाड़े (यंग खगोल विज्ञान समूह, नागपुर), रश्मि वर्मा (आर. के. साइंस सेंटर, नागपुर), नितिन कुमार पटेल (अगस्त्या इंटरनेशनल फाउंडेशन, भोपाल), संजिव सुर्यवंशी (नवाचार गतिविधि समूह भारत) और मोतीलाल देवांगन (प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन) मंच पर उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अभिषेक शुक्ला ने की, जबकि संचालन समीक्षा गायकवाड़ व कुमार मण्डावी ने किया। आयोजन की सफलता में लखन लाल साहू, विद्यामती साहू, अशोक जंघेल, भुनेश्वर मरकाम, संध्या कुशल, मनीष अहीर सहित कई विज्ञान संचारकों का विशेष योगदान रहा।

🔹 परंपरा का पुनर्जीवन

इस सम्मान समारोह ने शिक्षक सम्मान की अनोखी और प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया। कार्यक्रम न केवल एक सम्मान समारोह रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव और नई प्रेरणा देने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा।

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