अकेले कर नापते हुए राजस्थान से जगन्नाथपुरी जाने निकले राजगिरी महाराज , पैदल चलते हुए 6 माह बाद सक्ती पहुंचे, अदम्य साहस का साक्षी बना सक्ती नगर

सक्ती। राजस्थान के करोली निवासी राजगिरी महाराज, जो 18 अप्रैल 2025 से अकेले कर नापने की यात्रा पर निकले थे, आज सक्ती पहुंचे। महाराज का यह सफर न केवल भक्ति और तप का प्रतीक है, बल्कि उनके अदम्य साहस और आस्था की जीवंत मिसाल भी है।
राजगिरी महाराज कमर में भगवा पटका और सर पर भगवा गमछा लपेटे हुए बिना किसी सामान के अपनी पवित्र यात्रा पूरी कर रहे हैं। यात्रा के दौरान उनका उद्देश्य केवल भौगोलिक दूरी तय करना नहीं है, बल्कि हर कदम में ध्यान और भक्ति को बनाए रखना है। स्थानीय लोग और भक्त उनकी अकेली यात्रा और कठोर तप देखकर गहरी प्रेरणा ले रहे हैं। राजगिरी महाराज की यह यात्रा जगन्नाथ स्वामी के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण का सजीव उदाहरण है।
स्वागत और सम्मान – श्री सिद्ध हनुमान मंदिर सक्ती
कंचनपुर में श्री सिद्ध हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित ओमप्रकाश वैष्णव जी ने राजगिरी महाराज का ससम्मान स्वागत किया। उन्हें राधा नामक गमछा भेंट किया गया, संध्या महाआरती में शामिल कराया गया और रात्रि भोजन तथा गर्मी से बचाव के लिए छाछ पिलाई गई।

श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार जगन्नाथ स्वामी से प्रार्थना करता है कि राजगिरी महाराज के सभी दुख और कष्ट दूर हों और वे शीघ्र जगन्नाथपुरी पहुँचें।
राजगिरी महाराज कमर में भगवा पटका और सर पर भगवा गमछा लपेटे हुए बिना किसी सामान के अपनी पवित्र यात्रा पूरी कर रहे हैं। यात्रा के दौरान उनका उद्देश्य केवल भौगोलिक दूरी तय करना नहीं है, बल्कि हर कदम में ध्यान और भक्ति को बनाए रखना है। स्थानीय लोग और भक्त उनकी अकेली यात्रा और कठोर तप देखकर गहरी प्रेरणा ले रहे हैं।




