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सक्ती: खदान के पक्ष में ‘सेटिंग’ के आरोपों के बीच डुमरपारा में जनसुनवाई का विरोध, पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल


सक्ती/डुमरपारा। एमआरएस मिनरल्स की प्रस्तावित डोलोमाइट खदान के खिलाफ डुमरपारा में आयोजित जनसुनवाई उस वक्त उबाल पर पहुंच गई, जब सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में परियोजना का विरोध करते हुए पूरे आयोजन को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। बीच जंगल में आयोजित इस जनसुनवाई ने पारदर्शिता और नियत—दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए।


जनता का आक्रोश इस कदर था कि जनसुनवाई स्थल विरोध के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने साफ कहा—“हमारी जमीन, हमारा जंगल, हमारी जिंदगी… और फैसला कोई और करेगा, यह मंजूर नहीं!”


सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मंच पर मौजूद अधिकारी जनता के तीखे सवालों का जवाब देने में असहज और असमर्थ नजर आए। पर्यावरणीय प्रभाव, जल स्रोतों के खत्म होने का खतरा, वन्यजीवों पर असर और संभावित विस्थापन जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिकारी चुप्पी साधे रहे, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा।


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जनता और मीडिया को ‘सेट’ करने की कोशिश की गई, लेकिन डुमरपारा की जनता ने एकजुट होकर इस मंसूबे को नाकाम कर दिया। “हम बिकने वाले नहीं हैं” जैसे नारों ने पूरे माहौल को आंदोलित कर दिया।


विरोध की आग को और भड़काने वाला मुद्दा था—सागौन पेड़ों की कटाई का पुराना मामला। ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया कि इसी खदान के मालिक ने वन विभाग की मिलीभगत से 209 नग सागौन के पेड़ काट डाले थे, लेकिन उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उसी परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया ने लोगों के जख्म फिर हरे कर दिए हैं।


जनसुनवाई में भारी पुलिस बल की तैनाती ने भी कई सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना था कि अगर सब कुछ पारदर्शी और जनहित में है, तो फिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था क्यों? क्या प्रशासन को पहले से विरोध का अंदेशा था?


ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग रखी कि जब तक सागौन कटाई प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक खदान को किसी भी तरह की अनुमति न दी जाए।


इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना जनता की सहमति और विश्वास के कोई भी विकास परियोजना सफल नहीं हो सकती। डुमरपारा की यह जनसुनवाई अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभावनाओं के विस्फोट का प्रतीक बन चुकी है।

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