सक्ती जिला

प्रभारी एसडीओ के भरोसे आरईएस, बरसों से कुंडली जमा कर बैठे अधिकारी कर्मचारी बन रहे भ्रष्टाचार का कारण

0 ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों की लगातार मिल रही शिकायतें

सक्ती। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग में अफसरों का बोलबाला अभी भी जारी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद इन पर गाज गिरना तो दूर उच्चाधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। बरसों से कुंडली जमा कर बैठे इंजीनियरों तथा विभाग के कर्मचारियों के हौसले कमीशन खोरी के मामले में बुलंद हो चुके हैं। बिना किसी कारण कमी निकाल कर सरपंचों को घुमाना यहां आने वाले लोगों के काम नहीं करना इन अधिकारियों की आदत में शुमार हो चुका है।
इस विभाग के एक विवादित इंजीनियर की शिकायत सरपंच संघ ने मिलकर जनपद पंचायत सीईआे से भी कर दी थी। जिसमें करीब आधे से अधिक सरपंचों ने आवेदन पर अपने दस्तखत किए थे। इसके बाद भी उच्च अधिकारी ऐसे अफसरों पर आशीर्वाद बना कर रखे हुए हैं जो कि एक सोचनीय विषय है। यही कारण है कि ऐसे भ्रष्टाचारियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं।

प्रभारी एसडीओ के भरोसे चल रहे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा का हाल इन दिनों बद से बदतर हो चुका है। ना तो कोई काम आगे सरक रहे हैं और ना ही आने वालों को किसी भी प्रकार से कर्मचारियों का उचित व्यवहार देखने को मिल रहा है। विदित हो कि इन दिनों यहां के प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी पैकरा हैं जो कि लगातार विवादों से नाता बनाए हुए हैं। कुछ इसी प्रकार का हाल यहां पदस्थ इंजीनियरों का है जो कि ना तो कभी फील्ड में नजर आते हैं और ना ही कभी अपने कार्यालय में। जब भी फरियाद लेकर आने वाला फरियादी इनसे फोन पर संपर्क करता है तो वे मैदानी इलाके में होने की दुहाई देते हैं। शिकायतें तो यहां तक मिल रही हैं कि खुलेआम कमीशन की मांग की जा रही है तभी कार्य करने की बात होती है। जनपद पंचायत अंतर्गत एक ग्राम पंचायत के सरपंच ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लगातार इस विभाग के इंजीनियर उसे कमीशन के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। यदि कमीशन नहीं दिया जाता या कोई भेंट नहीं की जाती तो उनका काम आगे नहीं सरकता। लगातार सुबह से लेकर शाम तक दर्जनों सरपंच ऑफिस के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात न तो कभी एसडीओ से होती है और नहीं कभी इंजीनियरों से अधिकतर समय अधिकारी फोन पर ही काम निपटाने की सोचते हैं।

वर्षों से जमे पड़े अधिकारी भी भ्रष्टाचार की एक वजह –

लंबे समय के बाद एसडीओ रहे डीएस सिदार का स्थानांतरण हुआ है। यहां पदस्थ इंजीनियर तथा अन्य कर्मचारी भी कई वर्षों से पदस्थ हैं। यह भी भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण साबित हो सकता है। टेबल में बैठने वाले कर्मचारी इन अधिकारियों के लिए मोहरे के रूप में कार्य करते हैं। यह एक माध्यम है जो कमीशन को इन अधिकारियों तक पहुंचाता है। कार्यालय में देखने को मिला कि एक सूचना के अधिकार का फरियादी लगातार महीने भर से यहां चक्कर काट रहा है लेकिन उसने यहां के कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि आरटीआई का किसी भी प्रकार से यहां के अधिकारियों के द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया है। कुल मिलाकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस प्रकार एक नागरिक अधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

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