समुद्री तूफ़ान को चीरकर सक्ती के कमल बने ‘ओसियन मैन’ — सक्ती के कमल किशोर साहू ने गोवा में रचा इतिहास, समुद्र की लहरों पर लहराया हौसले का परचम

सक्ती। समर्पण, साहस और आत्मविश्वास जब मिलते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। यही कहानी है सक्ती जिले के ग्राम पंचायत पतेरापाली निवासी कमल किशोर साहू पिता रामावतार साहू की, जिन्होंने समुद्री तूफ़ान के बीच विश्व की सबसे कठिन ओपन वॉटर स्विमिंग रेस — “ओसियन मैन” गोवा 2025— को पूरा कर इतिहास रच दिया।
गोवा के समुद्र तट पर 25 अक्टूबर को आयोजित इस रेस के एक दिन पहले चक्रवात ‘मोनथा’ के कारण तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश हो रही थी। ऊँची-ऊँची लहरें उठ रही थीं, जिससे समुद्र में उतरना भी जोखिम से खाली नहीं था। लेकिन कमल ने अपने अटूट जज़्बे और अथक मेहनत के दम पर 5 किलोमीटर की यह “ओपन वॉटर रेस” सफलतापूर्वक पूरी कर छत्तीसगढ़ के पहले ओसियन मैन बनने का गौरव हासिल किया।
“लहरें कितनी भी ऊँची क्यों न हों, हौसला उनसे बड़ा होना चाहिए” – कमल
कमल किशोर साहू का कहना है कि जब वे समुद्र में उतरे, तब लहरों की ऊँचाई डर पैदा कर रही थी। लेकिन मन में एक ही संकल्प था — “अगर मैं पीछे हटा तो अपने सपनों से धोखा दूँगा।” यही दृढ़ निश्चय उन्हें मंज़िल तक ले गया।
परिवार बना संबल, पत्नी रही प्रेरणा
कमल साहू ने कहा — “हर कठिनाई में मेरी पत्नी तारीका ने जिस तरह साथ दिया, वह मेरी असली ताकत बनीं। परिवार का भरोसा और दुआएँ मेरे साथ थीं।” उनकी माता श्रीमती रत्ना बाई साहू (पूर्व सरपंच) और पिता राम अवतार साहू ने सदैव उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
बीएचईएल भोपाल में डिप्टी मैनेजर पद पर कार्यरत
कमल किशोर साहू वर्तमान में बीएचईएल भोपाल में डिप्टी मैनेजर के पद पर पदस्थ हैं। कार्यक्षेत्र की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी दिनचर्या में स्विमिंग को शामिल रखा और नियमित अभ्यास के बल पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।
अब लक्ष्य दुबई — भारत के लिए नई चुनौती
कमल का अगला लक्ष्य दिसंबर 2025 में होने वाली ओसियन मैन वर्ल्ड चैंपियनशिप, दुबई है, जिसमें वे 10 किलोमीटर स्विमिंग रेस में भाग लेकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा — “अब लक्ष्य सिर्फ एक है — दुबई में भारत का तिरंगा ऊँचा लहराना।”
सक्ती से निकले जलयोद्धा ने बढ़ाया प्रदेश का मान
कमल की इस उपलब्धि से सक्ती जिला गौरवान्वित है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और युवाओं में उत्साह का माहौल है। सभी का कहना है कि कमल किशोर साहू ने साबित किया है —
“अगर इरादे सच्चे हों, तो समुद्र की गहराइयाँ भी रास्ता बना देती हैं।”
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