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सहकारी समिति के सात कर्मचारी बर्खास्त, कर्मचारी संघ ने निर्णय को बताया दमनकारी, एस्मा लागू होते ही प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

सक्ती। जिले में धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ शासन की ओर से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए धान खरीदी को आवश्यक सेवा की श्रेणी में शामिल किया गया है। मुख्य सचिव द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जारी निर्देशों के बाद शासन ने एस्मा (Essential Services Maintenance Act) लागू करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। इसके तहत जिला सहकारिता विभाग ने जिले के सात सहकारी समिति कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

सहायक आयुक्त सहकारिता, जिला सक्ती द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार निम्न कर्मचारियों को धान खरीदी कार्य में बाधा पहुँचाने के आरोप में सेवा से पृथक किया गया है उनमें एकलव्य चन्द्रा – नावापारा समिति, विरेंद्र महान – कर्रापाली समिति, पुरुषोत्तम बरेठ – जर्वे समिति, धनीराम साहू – सक्ती समिति, तोपसिंह चन्द्रा – सकर्रा समिति, ललित साहू – घोघरी समिति, तरुणेन्द्र शेखर तिवारी – डूमरपारा समिति शामिल है। प्रशासन के अनुसार धान खरीदी जैसे व्यापक लोकहित के कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा अस्वीकार्य है, और किसानों को होने वाली संभावित समस्याओं को देखते हुए यह कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी।

संघ का तीखा विरोध—“दमनकारी कार्रवाई, हम पीछे हटने वाले नहीं” –

सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने बर्खास्तगी की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संघ के जिला अध्यक्ष एकलव्य चंद्र ने साफ शब्दों में कहा कि यह निर्णय कर्मचारी हितों का दमन है और शासन का कदम पूरी तरह एकतरफा है। उन्होंने कहा—
“हर कर्मचारी को अपने हक और अधिकारों की मांग उठाने का पूर्ण अधिकार है। शासन-प्रशासन ने जिस प्रकार बिना सुनवाई, बिना समाधान और बिना सकारात्मक संवाद के बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण और दमनकारी है। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब तक हमारी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

संघ का कहना है कि कर्मचारियों की मांगें वर्षों से लंबित हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दंडित किया जा रहा है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अब जिले भर में व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।

धान खरीदी व्यवस्था पर असर?

प्रशासन के इस अचानक निर्णय से कई समितियों में कामकाज पर तात्कालिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। जिले में धान खरीदी शुरू होने को है, ऐसे में कर्मचारियों की कमी से व्यवस्थाएँ प्रभावित हो सकती हैं। यद्यपि प्रशासन का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली गई है और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

आगे क्या?

संघ ने इस कार्रवाई के खिलाफ जिला स्तर पर विरोध दर्ज करवाने और आवश्यक होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

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