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मनरेगा में करोड़ों नहीं, पर “लाखों” की गूंजती चुप्पी: सामाजिक अंकेक्षण में 43 लाख से अधिक के काम ‘कागजों में पूरे, जमीन पर शून्य’

रातों-रात फेवर ब्लॉक बिछाने का वीडियो वायरल

मालखरौदा/ मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी रोजगार गारंटी योजना में भारी अनियमितता का मामला सामाजिक अंकेक्षण के दौरान सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जनपद पंचायत डभरा अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबरा सहित अन्य ग्रामों में मनरेगा के तहत स्वीकृत 43 लाख रुपये से अधिक की निर्माण राशि के कार्य कागजों में तो पूरे दर्शाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में एक भी काम प्रारंभ नहीं पाया गया। यह खुलासा 12 जनवरी 2026 को आयोजित विशेष ग्राम सभा में सामाजिक अंकेक्षण अधिकारियों द्वारा किया गया।

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान अधिकारियों ने मनरेगा अंतर्गत कराए गए सभी निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया, ग्रामीणों से जानकारी ली और स्वीकृत कार्य स्थलों पर जाकर मौके का मुआयना किया। जांच में सामने आया कि मुंडा पहुंच मार्ग में इंटरलॉकिंग सीमेंट ब्लॉक टाइल्स कार्य के लिए स्वीकृत 15 लाख 81 हजार 558 रुपये का काम शुरू ही नहीं हुआ। इसी तरह धरसा रोड मिट्टी निर्माण स्थल पर दो पुलिया निर्माण हेतु स्वीकृत 67 हजार 472 रुपये, पूर्व माध्यमिक शाला में इंटरलॉकिंग सीमेंट ब्लॉक टाइल्स के लिए 17 लाख 2 हजार 74 रुपये तथा मालिकराम टंडन घर से ग्राम कांसा की ओर फेवर ब्लॉक निर्माण हेतु स्वीकृत 11 लाख 30 हजार 66 रुपये का कार्य भी मौके पर कहीं नजर नहीं आया। इन सभी कार्यों का संबंध पूर्व सरपंच, सचिव, रोजगार सहायकों और विभागीय अधिकारियों से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये कार्य पूर्व सरपंच के कार्यकाल के दौरान स्वीकृत हुए और राशि का आहरण पहले ही कर लिया गया, जबकि धरातल पर काम नहीं कराया गया।

मामला तब और गंभीर हो गया जब 19 जनवरी 2026 की रात एक निर्माण कार्य को आनन-फानन में शुरू किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में जिस स्थल पर रातों-रात फेवर ब्लॉक बिछाए जा रहे थे, वहां एक दिन पहले ही सामाजिक अंकेक्षण दल ने कार्य शून्य पाया था। आरोप है कि शिकायत की भनक लगते ही पूर्व सरपंच पिलीबाई पति मनीराम द्वारा रात के अंधेरे में मनरेगा का काम शुरू कराया गया, ताकि जांच से पहले स्थिति बदली जा सके। ग्रामीणों ने सवाल उठाए कि मनरेगा का काम रात में कैसे हो सकता है, क्या मनरेगा इंजीनियर रात में कार्य कराते हैं, और क्या एक साल पहले राशि निकाल लेने के बाद अब काम कराया जा सकता है। जब वर्तमान सरपंच, उपसरपंच और पंचों ने रात में कार्य कराने का विरोध किया, तो पूर्व सरपंच से जुड़े लोग नहीं माने। इसकी सूचना जनपद सीईओ डभरा को भी फोन के माध्यम से दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत गोबरा भ्रष्टाचार और घोटाले का गढ़ बनती जा रही है, जहां मनरेगा जैसी योजना में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। सामाजिक अंकेक्षण अधिकारी श्रीमती सहोद्रा सूर्यवंशी ने स्पष्ट कहा कि सभी निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया है और अधिकांश कार्य मौके पर पाए ही नहीं गए। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में केवल पूर्व सरपंच तक कार्रवाई सीमित रहेगी या सचिव, रोजगार सहायक और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी। सामाजिक अंकेक्षण ने भले ही अनियमितताओं की परतें खोल दी हों, लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन की है—कार्रवाई फाइलों में सिमटेगी या दोषियों तक पहुंचेगी।

सामाजिक अंकेक्षण दल की अधिकारी श्रीमती सहोद्रा सूर्यवंशी ने स्पष्ट रूप से कहा—

“विशेष ग्राम सभा के दौरान मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत सभी निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया। जिन कार्यों के लिए राशि स्वीकृत एवं आहरित की गई थी, वे अधिकांश स्थानों पर मौके पर प्रारंभ ही नहीं पाए गए। निरीक्षण के समय कार्य स्थलों पर किसी प्रकार की प्रगति नहीं दिखी। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जा रही है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई सक्षम स्तर से की जाएगी।”

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