सकर्रासक्ती जिलासक्ती नगर

सक्ती: एट्रोसिटी मामले में युवक के फरार होने और पुलिसकर्मियों के निलंबन की खबर निकली झूठी; हाईकोर्ट की गिरफ्तारी रोक के बाद उमाशंकर साहू स्वयं पहुंचे थे कोर्ट

सक्ती। एट्रोसिटी प्रकरण में तामिली के दौरान युवक के कोर्ट से फरार होने और ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों के निलंबन की चर्चाएँ पूरी तरह तथ्यहीन साबित हुई हैं। जांच-पड़ताल और आधिकारिक जानकारी के अनुसार न तो आरोपी उमाशंकर साहू कोर्ट से भागे थे और न ही किसी प्रधान आरक्षक या आरक्षक को निलंबित किया गया है। गलत और अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर फैली ये खबरें अब स्पष्ट रूप से निराधार साबित हो चुकी हैं।

नोटिस पर स्वयं कोर्ट पहुंचे थे उमाशंकर साहू

मालखरौदा निवासी उमाशंकर साहू पिता मकसूदन साहू को तामिली नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के अनुपालन में वे स्वयं न्यायालय पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो पुलिस उन्हें ले गई थी और न ही अभिरक्षा में लाई गई। वे अपने वकील संजीव नामदेव के साथ तय प्रक्रिया के अनुसार न्यायालय पहुँचे और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस लौट आए।

हाईकोर्ट ने पहले ही दे दी थी गिरफ्तारी पर रोक

उल्लेखनीय है कि उमाशंकर साहू के विरुद्ध थाना मालखरौदा में अपराध क्रमांक 204/2025 दिनांक 09 सितंबर 2025 को एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध है। इस मामले को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। सीआरएमपी नंबर 3177/2025 में 17 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक लगा दी थी। ऐसे में फरार होने की बात तार्किक ही नहीं, तथ्यहीन भी है।

6 और 11 नवंबर को भी हुए थे कोर्ट में उपस्थित

उप पुलिस अधीक्षक द्वारा 6 नवंबर को चालान पेश करने संबंधी आदेश जारी होने पर उमाशंकर अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट पहुंचे थे। 11 नवंबर को फिर से चालान पेश किए जाने की जानकारी मिली तो वे दोबारा न्यायालय उपस्थित हुए, परंतु मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण चालान पेश नहीं हो सका। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वापस लौट आए।

पुलिसकर्मियों के निलंबन की खबर भी निकली फर्जी

इन अफवाहों के बीच प्रधान आरक्षक कृष्णकुमार तिवारी और आरक्षक रामकुमार जगत के निलंबन की बात भी सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों में फैलने लगी थी। जबकि इस संबंध में किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस विभाग ने ऐसी किसी घटना या आदेश से स्पष्ट इनकार किया है।

एएसपी हरीश यादव ने दी साफ जानकारी

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव ने कहा कि पुलिस अभिरक्षा से फरार होने का कोई मामला नहीं हुआ है। इसी तरह आरक्षकों के निलंबन की खबर भी गलत है। अपुष्ट जानकारी के कारण भ्रम की स्थिति बनी जिसके बाद तथ्यों को साफ कर दिया गया है।

‘मैं हमेशा जांच में सहयोग को तैयार हूं’ — उमाशंकर

उमाशंकर साहू ने कहा कि उन्होंने हमेशा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया है तथा नोटिस मिलते ही कोर्ट में उपस्थित होते रहे हैं। वे आगे भी हर जांच और कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

समग्र रूप से, एट्रोसिटी मामले में फैल रहीं अफवाहें और चर्चाएँ गलत सिद्ध हो चुकी हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी द्वारा न्यायालय में उपस्थिति दी गई थी, और किसी प्रकार की फरारी या पुलिसकर्मियों के निलंबन जैसी घटना घटित नहीं हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button