महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आने की आवश्यकता है – न्यायाधीश

– महिलाओं के लिए विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन
सक्ती–सामाजिक बुराइयों के कारण महिलाओं के अधिकार का उल्लंघन होता है और महिलाएं इसे चुपचाप बर्दाश्त करती रहती हैं । महिलाओं को अपने अधिकार के लिए आगे आने की आवश्यकता है तथा घर में गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है । उक्त विचार राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वाधान में जिला विधिक प्राधिकरण के कुशल निर्देशन में जन सेवा समिति हटरी धर्मशाला में आयोजित महिलाओं के लिए विधिक जागरूकता के संबंध में आयोजित कार्यशाला में जिला जांजगीर चांपा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार सोनी ने कही । न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं को अपने घर में ही उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है विशेष न्यायाधीश केआर रिगरी ने कहा कि सिर्फ रिपोर्ट लिखाने तक अपना दायित्व ना समझें पूरे विचारण के दौरान प्रकरण पर जानकारी होनी चाहिए तभी अपराधियों को सजा मिल पाएगी अन्यथा गंभीर मामलों में भी अपराधी छूट जाते हैं । कई बड़ी घटना होने पर कई संस्थाएं आंदोलनरत रख करती हैं एवं पुलिस भी न्यायालय में चार्ज शीट प्रस्तुत करने के बाद प्रकरण में गंभीरता नहीं लेती जिसके कारण महिलाओं को न्याय नहीं मिल पाता प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बीआर साहू ने कहा कि कानून में सबको समानता का अधिकार है । संविधान में जो अधिकार दिए गए हैं उसमें भेदभाव नहीं किया जा सकता महिलाओं के संबंध में बहुत सारे कानून बने हैं ।लेकिन समाज एवं परिवार में उन कानूनों का उल्लंघन किया जाता है ।जिससे महिलाएं अपनी कानूनी अधिकार से वंचित रहते हैं द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डॉक्टर ममता भोजवानी ने कहा कि महिलाओं को कानून में कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं जिनकी जानकारी सभी महिलाओं को नहीं होने के कारण वे अधिकारों से वंचित रहती हैं ।यशवंत कुमार सारथी विशेष न्यायाधीश ने एक गीत गाकर महिलाओं के अधिकारों के संबंध में जागरूक किया मैं आज की नारी हूं श्री सारथी ने कहा कि आप नहीं होते तो हम नहीं होते महिलाओं का इस देश में इस समाज में सबसे ऊंचा स्थान है यह हम सब को समझने की आवश्यकता है ।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गायत्री सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाएं कई मामलों में स्वयं पीछे रहकर कानून का उल्लंघन करती हैं और जिससे समाज में अपराधिक प्रवृत्ति बढ़ती है एक चल चित्र के माध्यम से महिलाओं को कैसे कानून का सहारा लेना चाहिए इसके बारे में बताया गया ।सुश्री चेतना ठाकुर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ,रजनी भगत उप जिलाधीश, अधिवक्ता किशोर न्याय बोर्ड के अध्यक्ष शिव त्रिपाठी , अलका जायसवाल अधिवक्ता ,अन्नपूर्णा राठौर ,आत्मानंद स्कूल की प्राचार्या पी गवेल ,जवाहरलाल नेहरु महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ शालू पाहवा ,महिला मारवाड़ी सम्मेलन की अध्यक्ष अरूणा अग्रवाल ,लिनेस क्लब की अमृता सिंह ,विजया जयसवाल ,डॉ प्रीति सिह ने अपने विचार व्यक्त किये । कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला एव बाल विकास विभाग के दीक्षा शर्मा ,रजनी यादव ,प्रमिला देवांगन ,पुलिस विभाग राजस्व विभाग स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग जन सेवा समिति धर्मशाला के अध्यक्ष अशोक खेतान, अधिवक्ता गिरधर जायसवाल का योगदान रहा ।कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गीतेश कौशिक ने किया कार्यक्रम के पश्चात न्यायालय परिसर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा विधिक सेवा कार्यालय का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीश गणों के अलावा अधिवक्ता गिरधर जायसवाल ,राकेश रोशन महंत ,अजीत सिंह, फलित लहरें ,सतनारायण सिंह ,मनोज जायसवाल ,महेश अग्रवाल ,के के राठौर सहित न्यायालय परिवार के कर्मचारी गण उपस्थित थे।




