सहकारी समिति के कर्मचारी 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर — चार सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के खिलाफ फूटा आक्रोश

सक्ती। प्रदेशभर में सहकारी समितियों के कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। लंबे समय से लंबित चार सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ एवं धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के संयुक्त आह्वान पर राज्यभर की 2058 समितियों के लगभग 15 हजार कर्मचारी आगामी 3 नवंबर से अपनी मांगे पूरी होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इस आंदोलन की सूचना कर्मचारियों ने ज्ञापन के माध्यम से अपने-अपने जिलों के उच्च अधिकारियों को दे दी है।
सक्ती जिले के मालखरौदा, डभरा, जैजैपुर, अड़भार, बाराद्वार, छपोरा, चंद्रपुर और हसौद समितियों के कर्मचारी शुक्रवार को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा सक्ती में एकत्र हुए। बैठक के बाद सभी कर्मचारियों ने रैली निकालकर जिला कार्यालय पहुंचकर जिला विपणन अधिकारी, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, नोडल अधिकारी, खाद्य अधिकारी और सहकारी बैंक शाखा प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि शासन की उदासीनता अब बर्दाश्त के बाहर है। वर्षों से वे किसानों के हित में लगातार सेवा दे रहे हैं, परंतु शासन उनकी मांगों पर मौन है।
प्रदेश में 24 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों में कर्मचारियों ने एक साथ प्रदर्शन कर शासन को चेतावनी दी थी कि यदि उनकी चार सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ, तो वे आगामी 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। इसी आंदोलन के दूसरे चरण में 28 अक्टूबर को रायपुर में प्रदेश स्तरीय “महा हुंकार रैली” आयोजित की जाएगी। इसके बाद संभागवार आंदोलन तेज किया जाएगा और मांगे पूरी नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर में धान खरीदी का बहिष्कार कर दिया जाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद संपूर्ण सूखत को मान्यता देकर राशि समितियों को दी जानी चाहिए। आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर वर्षों से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियमित किया जाए। समितियों को कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए तीन लाख रुपये का प्रबंधकीय अनुदान दिया जाए और संविदा कर्मचारियों को सीधी भर्ती में प्राथमिकता व बोनस अंक की व्यवस्था लागू की जाए।
कर्मचारियों ने कहा कि शासन के बार-बार आश्वासन के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। धान खरीदी का सीजन करीब है, लेकिन शासन की चुप्पी कर्मचारियों के भीतर असंतोष भर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगे नहीं मानी गईं तो इस वर्ष धान खरीदी का कार्य ठप रहेगा।
जिला स्तर पर सौंपे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा है कि वे अब किसी आश्वासन के भरोसे नहीं रहेंगे। जब तक शासन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। सहकारी समितियों के इस आंदोलन ने जिले से लेकर प्रदेश तक प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।




