वेदांता स्किल स्कूल बना ग्रामीण युवाओं के सपनों का सहारा, छत्तीसगढ़ में कौशल और रोजगार की नई इबारत लिख रहा संस्थान

सक्ती/कोरबा। ग्रामीण छत्तीसगढ़ के हजारों युवाओं के लिए जहां सपनों और अवसरों के बीच दूरी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं वेदांता स्किल स्कूल उनके लिए उम्मीद और बदलाव का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और रोजगार से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा यह संस्थान आज प्रदेश में ग्रामीण प्रतिभाओं को नई पहचान दिला रहा है। वर्ष 2011 में बालको की सीएसआर पहल के तहत स्थापित वेदांता स्किल स्कूल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और औपचारिक रोजगार के बीच मौजूद खाई को पाटना था। कोरबा, कबीरधाम और सरगुजा जिलों में संचालित यह संस्थान अब तक 15 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। पिछले एक वर्ष में ही 1200 से अधिक युवाओं ने यहां प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें से 83 प्रतिशत युवाओं को देश के 12 राज्यों में रोजगार मिला।
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
ग्रामीण युवाओं के जीवन में इस संस्थान ने किस तरह बदलाव लाया है, इसकी मिसाल अविलचना महंत और निशा महंत जैसी युवतियां हैं। अविलचना महंत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थीं। उनके पिता दैनिक मजदूरी कर परिवार चलाते थे। बेहतर भविष्य की तलाश में उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में फिटर इलेक्ट्रिकल असेंबली कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण लिया। यहां उन्हें तकनीकी कौशल, अनुशासन और औद्योगिक वातावरण की समझ मिली। प्रशिक्षण के बाद उन्हें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में ऑपरेटर के रूप में नौकरी मिली, जहां वे आज अपने परिवार का सहारा बनने के साथ उच्च शिक्षा के लिए भी बचत कर रही हैं। इसी प्रकार निशा महंत ने कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था और परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। वेदांता स्किल स्कूल में फूड एंड बेवरेज सर्विस का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें रोजगार मिला। बाद में परिस्थितियोंवश वापस घर लौटने के बावजूद उन्होंने अपने कौशल के दम पर स्थानीय स्तर पर होटल आशिर्वाद इन में कार्य प्राप्त किया और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए छोटी बहन की पढ़ाई भी जारी रखी।
केवल प्रशिक्षण नहीं, आत्मनिर्भरता का माध्यम
वेदांता स्किल स्कूल की विशेषता इसका पूर्णतः निःशुल्क आवासीय मॉडल है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवा भी बिना किसी वित्तीय बोझ के प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं। यहां राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) प्रमाणित पाठ्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी दक्षता, सुरक्षा, अनुशासन और कार्यस्थल के व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संस्थान युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार नहीं करता, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जीवन कौशल भी विकसित करता है। देशभर के उद्योगों और कंपनियों से जुड़े मजबूत नेटवर्क के माध्यम से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
महिलाओं और वंचित वर्गों को मिल रही नई पहचान
वेदांता स्किल स्कूल में प्रशिक्षित होने वाले युवाओं में 61 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी वंचित समुदायों से आते हैं। यह पहल महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। संस्थान से जुड़े मेंटर्स भी युवाओं के उत्साह और सीखने की लगन की सराहना कर रहे हैं। आईबी लॉजिस्टिक्स से जुड़े मेंटर रघुराज सिंह ने कहा कि यहां युवाओं के साथ संवाद और मार्गदर्शन का अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा। युवाओं की सीखने की इच्छा और आगे बढ़ने का जज्बा उन्हें भी प्रेरित करता है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य के लिए वेदांता स्किल स्कूल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। संस्थान को वर्ष 2026 में “आईसीसी सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। वेदांता स्किल स्कूल आज केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला मंच बन चुका है। यह पहल साबित कर रही है कि यदि सही मार्गदर्शन, अवसर और संसाधन मिलें तो ग्रामीण प्रतिभाएं भी देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।




