भारत की स्वर परंपरा को समर्पित महत्वपूर्ण दस्तावेज ‘आवाज़ों के जुगनू’ का विमोचन

डॉ. शेफाली चतुर्वेदी द्वारा संपादित पुस्तक में देश के प्रसिद्ध वॉइस आर्टिस्ट्स की जीवन यात्रा और योगदान को किया गया संकलित
नई दिल्ली। भारत की समृद्ध स्वर परंपरा और वॉइस आर्टिस्ट्स के योगदान को सहेजने वाली महत्वपूर्ण पुस्तक ‘आवाज़ों के जुगनू : द वॉइस मास्टर्स ऑफ इंडिया’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। डॉ. शेफाली चतुर्वेदी द्वारा संकलित एवं संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) द्वारा किया गया है। पुस्तक का विमोचन जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित IGNCA परिसर में किया गया। इसे प्रिंट और ऑडियो दोनों स्वरूपों में जारी किया गया है। यह पुस्तक भारत की उस मौखिक परंपरा को दस्तावेज़ी रूप देने का प्रयास है, जिसने सदियों तक ज्ञान, संस्कृति और भावनाओं को आवाज़ के माध्यम से जीवित रखा। रेडियो, दूरदर्शन, विज्ञापन, डबिंग, उद्घोषणा और मंचीय कविता से जुड़े कलाकारों की संघर्ष यात्रा, रचनात्मक योगदान और जीवन प्रसंगों को इसमें विस्तार से शामिल किया गया है।
पुस्तक में तीन पीढ़ियों के प्रसिद्ध स्वर कलाकारों को स्थान दिया गया है। पहली पीढ़ी में आकाशवाणी समाचार के प्रसिद्ध स्वर पंडित देवकीनंदन पांडेय, सुरोजीत सेन, राजेंद्र चुघ और ‘बिनाका गीतमाला’ के अमीन सयानी जैसे नाम शामिल हैं। वहीं दूरदर्शन की चर्चित प्रस्तोता तबस्सुम को भी विशेष रूप से याद किया गया है।
दूसरी पीढ़ी में शम्मी नारंग, रिनी सायमन, क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले, तान्या पुरोहित और एफएम गोल्ड के राजीव सक्सेना जैसे चर्चित नामों को शामिल किया गया है। तीसरी पीढ़ी में कुमार विश्वास, आरजे सायमा, आरजे सिमरन, रिचा अनुरुद्ध, चेतन शशिताल, सोनल कौशल और अन्य डबिंग कलाकारों की भूमिका को रेखांकित किया गया है, जिनकी आवाज़ें बच्चों और युवाओं की स्मृतियों का हिस्सा बन चुकी हैं। पुस्तक विमोचन अवसर पर IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि यह गैर-पारंपरिक कला से जुड़े कलाकारों के दस्तावेजीकरण की एक महत्वपूर्ण और साहसिक पहल है। वहीं प्रसिद्ध उद्घोषक हरीश भीमानी ने इसे भारत के सांस्कृतिक डीएनए का दस्तावेज बताते हुए कहा कि शब्द भले मौन हो जाएं, लेकिन आवाज़ों की गूंज सभ्यता को जीवित रखती है। पुस्तक को भारत के वॉइस आर्टिस्ट्स और मौखिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। जल्द ही इसका अंग्रेजी संस्करण भी प्रकाशित किए जाने की तैयारी है।




