“संगीत और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले श्याम कुमार चन्द्रा का 15 अगस्त को हुआ निधन”, “राज्य से लेकर राष्ट्र तक गूँजता रहा स्वर — सक्ती की सांस्कृतिक विरासत को लगा अपूरणीय आघात”

सक्ती। स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को सक्ती के प्रख्यात संगीतकार, साहित्यकार एवं श्याम संगीत सृजन संस्थान के संस्थापक श्याम कुमार चन्द्रा का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और संगीत–साहित्य जगत ने एक ऐसे रत्न को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
श्याम कुमार चन्द्रा ने अपने जीवन का हर पल संगीत और साहित्य के उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने राज्य के कई हिस्सों में संगीत विद्यालय प्रारंभ करवाए, जिससे हजारों विद्यार्थियों को शास्त्रीय, लोक और आधुनिक संगीत की शिक्षा मिली। साहित्य के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी रचनाओं से गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, जिनमें संगीत, कविता और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कृतियाँ प्रमुख हैं। उनकी पुस्तकों को न केवल स्थानीय पाठकों ने सराहा, बल्कि साहित्यिक मंचों पर भी सम्मान मिला।
उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें राज्यपाल द्वारा किया गया सम्मान विशेष उल्लेखनीय है। वे न केवल एक कुशल संगीतज्ञ थे, बल्कि एक प्रेरक शिक्षक, आयोजक और लेखक भी थे, जिन्होंने संगीत और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प निभाया।
व्यक्तिगत जीवन में वे सौम्य स्वभाव, सरलता और विनम्रता के लिए जाने जाते थे। वे विजय चंद्रा और चिरंजीव चंद्रा के पिताश्री थे। परिवार, शिष्य और मित्रमंडली उनके जाने को एक व्यक्तिगत और सांस्कृतिक क्षति मान रही है।
उनका अंतिम संस्कार उनके गृह ग्राम बरभांठा में किया जाएगा, जहाँ परिजन, शिष्य, साहित्य–संगीत प्रेमी और ग्रामीणजन उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
सक्ती नगर सहित पूरे क्षेत्र में उनके निधन की खबर से गहरा शोक व्याप्त है। लोग उन्हें हमेशा एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद करेंगे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन कला, संस्कृति, साहित्य और शिक्षा को समर्पित कर दिया।




