बालदिवस पर विशेष: सक्ती के हरिओम अग्रवाल के पास संरक्षित है जवाहरलाल नेहरू का दुर्लभ ‘प्रिंटिंग मिस्टेक’ डाक टिकट

फिलेटली जगत में इस टिकट का है खास महत्व, विरासत संजोने की मिसाल बने हरिओम
सक्ती। देशभर में बालदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बच्चों के प्रिय चाचा नेहरू की जन्मजयंती पर लोग उनके जीवन, विचारों और बच्चों के प्रति उनके अथाह प्रेम को याद कर रहे हैं। इसी बीच सक्ती शहर के सुप्रसिद्ध संग्रहकर्ता हरिओम अग्रवाल ने एक ऐसी अनमोल धरोहर साझा की है, जिसने इतिहास और फिलेटली—दोनों क्षेत्रों के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हरिओम अग्रवाल के पास जवाहरलाल नेहरू का एक अत्यंत दुर्लभ ‘प्रिंटिंग मिस्टेक’ डाक टिकट वर्षों से संरक्षित है, जिसे उन्होंने विशेष देखभाल के साथ संभालकर रखा हुआ है।
कैसे मिला यह दुर्लभ टिकट?
हरिओम अग्रवाल ने बताया कि कई वर्ष पहले एक पुराने संग्रह को व्यवस्थित करते समय उन्हें यह टिकट मिला था। पहली नजर में साधारण प्रतीत होने वाले इस टिकट में गहराई से देखने पर प्रिंटिंग की त्रुटि दिखाई दी। उन्होंने विशेषज्ञों से संपर्क कर इसकी जांच कराई, जिसमें पुष्टि हुई कि यह दुर्लभ श्रेणी का टिकट है। ऐसे प्रिंटिंग मिस्टेक टिकट बहुत सीमित संख्या में छपते हैं और बाजार में इनकी उपलब्धता बेहद कम होने के कारण इन्हें फिलेटली की कीमती धरोहर माना जाता है।
फिलेटली जगत में महत्व
डाक टिकट विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के त्रुटिपूर्ण टिकट इतिहास, मुद्रण तकनीक और समय के परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अक्सर ऐसे टिकटों को ‘अनकलेक्टेड रत्न’ कहा जाता है, क्योंकि यह न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि समय के साथ-साथ इनकी आर्थिक कीमत भी कई गुना बढ़ती जाती है।
बालदिवस पर धरोहर का प्रदर्शन
बालदिवस के अवसर पर हरिओम अग्रवाल ने इस टिकट को प्रदर्शित करते हुए कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बच्चों के भविष्य को लेकर अत्यंत संवेदनशील थे। उन्होंने कहा—“यह टिकट केवल एक कलेक्शन नहीं, बल्कि इतिहास का वह पन्ना है जो हमें याद दिलाता है कि चाचा नेहरू का बच्चों के प्रति प्रेम और शिक्षा के प्रति उनकी दृष्टि आज भी प्रेरणा देती है।”
स्थानीय लोगों में उत्सुकता
इस दुर्लभ टिकट की जानकारी सामने आने के बाद शहर के इतिहास प्रेमियों और स्टैंप कलेक्टर्स में खासा उत्साह देखा गया। कई लोगों ने हरिओम अग्रवाल से इस टिकट को देखने और इसके इतिहास को समझने की इच्छा जताई है। हरिओम अग्रवाल इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाने का संकल्प रखते हैं।
बालदिवस पर अनोखा संदेश
बालदिवस पर इस अद्वितीय टिकट का चर्चा में आना इस बात का प्रतीक है कि भारत का इतिहास केवल किताबों में नहीं बल्कि ऐसे दुर्लभ संग्रहों में भी जीवंत है।
चाचा नेहरू की बाल-प्रेम की भावना और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आकांक्षा को याद दिलाने वाली यह धरोहर आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।




