सक्ती जिला

प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कें बदहाल: 15 साल में मरम्मत तक नहीं, ग्रामीणों को भारी परेशानी

मालखरौदा। ग्रामीण अंचल में निवासरत लोगों को बारहमासी पक्की सड़क सुविधा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाए गए सड़क मार्ग अब बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। निर्माण के 15 वर्षों बाद भी इन सड़कों की मरम्मत नहीं की गई, जिससे आवागमन दूभर हो गया है। ग्रामीणों में विभागीय लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।

वर्ष 2008-09 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मेन रोड नगझर से ग्राम नावापारा–कुरदी, मेन रोड बड़े सीपत से बड़े रबेली, तथा मेन रोड बेल्हाडीह से चांटीपाली–खेमड़ा सहित मालखरौदा क्षेत्र के दर्जन भर गांवों को पक्के सड़क मार्ग से जोड़ा गया था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें हर मौसम में बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। सड़कें भी प्रारंभ में काफी अच्छी बनाई गईं, परंतु विगत वर्षों में रखरखाव के अभाव ने इन सड़कों की हालत बेहद खराब कर दी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने की बात करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अधिकांश सड़कें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं, गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे राहगीरों को चलना तक मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि 15 वर्षों के लंबे अंतराल में एक बार भी इन सड़कों की संपूर्ण मरम्मत नहीं की गई। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी का आलम यह है कि अब यह सड़कें लोगों की सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई हैं।

सड़क निर्माण के उद्देश्य से जिस योजना के अंतर्गत गांवों को जोड़कर विकास की गाथा लिखी गई थी, अब वहीं सड़कें ग्रामीण विकास की धीमी गति और सरकारी लापरवाही का आईना बन गई हैं।

जिला बना, पर अब तक नहीं खुला विभागीय कार्यालय

सक्ती को जिला बने वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि अब तक यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से संबंधित विभागीय कार्यालय की स्थापना नहीं की गई है। ना तो यहां अधिकारी पदस्थ हैं और ना ही कर्मचारी। ऐसे में सड़क मरम्मत या नए निर्माण की प्रक्रिया केवल कागज़ों तक सीमित रह गई है।

जनता का सवाल – क्या ऐसे ही चलता रहेगा विकास का पहिया?

गांव-गांव में पक्की सड़कें बनवाने के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट पारित होता है, लेकिन यदि वर्षों पुरानी सड़कों की मरम्मत भी न हो पाए, तो यह बजट कहां जा रहा है? ग्रामीणों का कहना है कि जब ‘प्रधानमंत्री’ के नाम से बनी सड़कें इतनी बदहाल हैं, तो अन्य योजनाओं की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

अब ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इन जर्जर सड़कों की मरम्मत कराई जाए, साथ ही जिला स्तर पर संबंधित विभाग का कार्यालय भी शीघ्र स्थापित किया जाए, ताकि विकास कार्यों की निगरानी व क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से हो सके।

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