सक्ती जिला

जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू फरार, बाजपेईयों ने जल्द गिरफ्तारी के लिए सौंपा ज्ञापन, किसानों के फर्जी हस्ताक्षर और करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का आरोप

सक्ती /जैजैपुर। कांग्रेस के विधायक बालेश्वर साहू पुलिस जांच का सामना करने के बजाय फरार हो गए हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने अपने सहयोगी के साथ मिलकर वर्ष 2015 से 2025 तक किसानों के फर्जी हस्ताक्षर और ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर 42 लाख 78 हजार रुपये की अवैध निकासी की और किसानों का पैसा गबन किया।

इस गंभीर मामला उजागर होने के बाद आज जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों के भाजपा नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर विधायक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

मीडिया से बातचीत में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा,

> “बालेश्वर साहू का विधायक बनने से पहले से ही कमीशन, भ्रष्टाचार और अपराध से गहरा संबंध रहा है। किसानों के फर्जी अंगूठे लगाकर बैंक से लाखों रुपये निकालना बेहद घिनौना अपराध है। उन्हें विधायक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह धोखाधड़ी सिर्फ कुछ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के साथ विश्वासघात है।”



भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कृष्ण कांत चंद्रा ने कहा,

> “साहू ने किसानों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला है। यह केवल वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। यदि वह निर्दोष होते, तो जांच में सहयोग करते। उनका फरार होना इस बात का संकेत है कि दाल में कुछ काला है।”



भाजपा नेताओं का आरोप है कि बालेश्वर साहू ने वर्षों से किसानों की जमीन, ऋण पुस्तिकाएं और दस्तावेज अपने कब्जे में रखकर फर्जी ऋण और निकासी की। उनका कहना है कि जांच आगे बढ़ी तो भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर होंगी।

भाजपा ने मांग की है कि:

1. कांग्रेस तुरंत बालेश्वर साहू को पार्टी से निष्कासित करे।


2. पुलिस शीघ्र गिरफ्तारी कर साक्ष्य सुरक्षित करे।


3. पीड़ित किसानों को हर्जाना और न्याय मिले।



ज्ञापन सौंपने के दौरान भाजपा के जिलाध्यक्ष अंबेश जांगड़े, सक्ती जिलाध्यक्ष टिकेश्वर गभेल, जिला पंचायत अध्यक्ष द्रौपदी चंद्रा, उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया, पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू, मोहनकुमारी साहू, कीर्तन चंद्रा, रामनरेश यादव, अनुभव तिवारी और आशुतोष गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

यह मामला न केवल जैजैपुर के किसानों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति और भ्रष्टाचार की जांच के लिए संवेदनशील साबित हो रहा है।

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