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अग्रसेन जयंती पर सामने आई महाराजा अग्रसेन की ऐतिहासिक डाक टिकट शीट, हरिओम अग्रवाल ने वर्षों से सहेजकर रखा अनमोल संग्रह

सक्ती। महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर नगर में इतिहास, परंपरा और सामाजिक विरासत से जुड़ा एक खास संग्रह आकर्षण का केंद्र बना। नगर के अग्र समाज के हरिओम अग्रवाल ने अपने पास वर्षों से सहेजकर रखी महाराजा अग्रसेन जी की स्मारक डाक टिकटों की शीट को जयंती के अवसर पर सामने लाया। इन डाक टिकटों पर महाराजा अग्रसेन जी का चित्र अंकित है, जो समाज के गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।

1976 में जारी हुए थे 25 पैसे के डाक टिकट

प्रस्तुत डाक टिकट शीट पर भारत सरकार के डाक टिकटों की पहचान के साथ प्रत्येक टिकट पर 25 पैसे का मूल्य अंकित दिखाई देता है। टिकटों पर महाराजा अग्रसेन जी का चित्र प्रमुखता से उकेरा गया है। एक ही शीट में व्यवस्थित रूप से लगे इन टिकटों का स्वरूप पुराने समय की डाक व्यवस्था और स्मारक टिकटों के संग्रह की परंपरा की याद दिलाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महाराजा अग्रसेन जी पर आधारित ये स्मारक डाक टिकट वर्ष 1976 में जारी किए गए थे। इस लिहाज से यह संग्रह लगभग पांच दशक पुराने डाक टिकटों की विरासत को सहेजे हुए है।

वर्षों तक सहेजकर रखा ऐतिहासिक संग्रह

आज के डिजिटल दौर में जब पत्रों और डाक टिकटों का दैनिक जीवन में उपयोग काफी कम हो गया है, ऐसे में पुराने डाक टिकटों को सुरक्षित रखना अपने आप में विशेष महत्व रखता है। हरिओम अग्रवाल द्वारा इस शीट को सहेजकर रखना इतिहास और सामाजिक स्मृतियों के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है। अग्रसेन जयंती के अवसर पर इसे सामने लाने से समाज के लोगों को महाराजा अग्रसेन जी से जुड़ी इस ऐतिहासिक स्मृति को देखने और उसके महत्व को समझने का अवसर मिला।

अग्र समाज की विरासत और गौरव का प्रतीक

महाराजा अग्रसेन जी को समाज में त्याग, समानता, सहयोग और लोककल्याण की भावना के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके आदर्श आज भी सामाजिक एकता, परस्पर सहयोग और जनसेवा की प्रेरणा देते हैं। ऐसे महापुरुषों के नाम पर जारी स्मारक डाक टिकट केवल डाक विभाग से जुड़ी वस्तु नहीं होते, बल्कि अपने समय के इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों को भी संजोते हैं।

अग्रसेन जयंती के अवसर पर हरिओम अग्रवाल द्वारा इस संग्रह को सामने लाना समाज की ऐतिहासिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। ऐसे संग्रहों का संरक्षण आने वाले समय में इतिहास, डाक टिकट संग्रह और सामाजिक विरासत में रुचि रखने वालों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

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