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आस्था का महासंगम! आज सक्ती से चंद्रपुर तक गूंजेंगे मां के जयकारे, निकलेगी मां महामाया की 27वीं भव्य पदयात्रा

मां महामाया के दरबार से मां चंद्रहासिनी के धाम तक उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब, 19 अक्टूबर को भजन संध्या एवं भंडारे में बहेगी भक्ति की धारा

सक्ती। जय माता दी के जयकारों, अटूट आस्था और मां के प्रति अगाध श्रद्धा के साथ आज 14 अक्टूबर को सक्ती से चंद्रपुर तक भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित होगी। सक्ती स्थित मां महामाया मंदिर से चंद्रपुर के प्रसिद्ध मां चंद्रहासिनी मंदिर तक 27वीं भव्य पदयात्रा निकाली जाएगी। मां के दोनों पावन दरबारों को जोड़ने वाली इस पदयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। भक्त मां महामाया का आशीर्वाद लेकर मां चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे।

27 वर्षों की परंपरा, अटूट आस्था और मां के चरणों में समर्पण

मां महामाया मंदिर सेवा समिति, सक्ती के तत्वावधान में आयोजित यह पदयात्रा धार्मिक आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। 27वीं बार आयोजित हो रही इस पदयात्रा ने क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। मां के जयकारों के बीच निकलने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं को भक्ति के सूत्र में बांधने के साथ आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश भी देगी।

सक्ती से चंद्रपुर तक का यह भक्तिमय सफर श्रद्धालुओं के लिए केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करने का विशेष अवसर है। मां के दर्शन की अभिलाषा और मन में अटूट विश्वास लिए भक्त इस धार्मिक परंपरा का हिस्सा बनेंगे।

मां की महिमा से गूंजेगी भजन संध्या, भंडारे में मिलेगा प्रसाद

धार्मिक आयोजन की कड़ी में 19 अक्टूबर को भजन संध्या एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भजन संध्या में मां की महिमा का गुणगान होगा और भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु माता की आराधना करेंगे। वहीं भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। यह आयोजन भक्ति के साथ सेवा, समर्पण और सामूहिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत करेगा।

संयोजक श्याम सुंदर अग्रवाल ने की श्रद्धालुओं से अपील

आयोजन की जानकारी संयोजक श्याम सुंदर अग्रवाल (जेएमडी) ने दी। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां महामाया की 27वीं भव्य पदयात्रा एवं 19 अक्टूबर को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनने की अपील की है।

आज मां महामाया के दरबार से मां चंद्रहासिनी के धाम तक निकलने वाली यह पदयात्रा सक्ती अंचल में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण निर्मित करेगी। मां के जयकारों के साथ आगे बढ़ते कदम भक्तों की उसी अटूट आस्था का संदेश देंगे, जो पीढ़ियों से क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है।

जय मां महामाया! जय मां चंद्रहासिनी!

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