सक्ती: निर्माण कार्यों में 25 प्रतिशत तक कमीशनखोरी, एडवांस पेमेंट पर काम – कलेक्ट्रेट में भी सक्रिय दलालों का जाल

सक्ती। जिले में विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर चल रही अव्यवस्थाओं ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में विभागीय निर्माण कार्यों की स्वीकृति और भुगतान के लिए 25 प्रतिशत तक कमीशन की मांग की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई ठेकेदारों और एजेंसियों को काम शुरू करने से पहले ही एडवांस पेमेंट देने के लिए दबाव बनाया जाता है।
कलेक्ट्रेट में भी सक्रिय दलाल
जिस कलेक्ट्रेट को प्रशासनिक पारदर्शिता का केंद्र माना जाता है, वहीं अब दलालों और बिचौलियों का कब्जा है। ठेकेदारों का आरोप है कि कलेक्ट्रेट में बैठे ये लोग “फिक्स रेट” तय करके ही किसी फाइल को आगे बढ़ाते हैं। कई बार बिचौलिए खुद अधिकारियों के नाम लेकर सौदेबाजी करते हैं, जिससे कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बट्टा लग रहा है।
गुणवत्ता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ठेकेदारों से एडवांस और कमीशन वसूली होगी, तो वे काम की गुणवत्ता से समझौता करने को मजबूर होंगे। “जो पैसा कमीशन में जाएगा, उसे ठेकेदार कहीं न कहीं घटिया सामग्री लगाकर वसूल करेगा” – यह बात स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कही। नतीजतन जिले की सड़कों, भवनों और सार्वजनिक उपयोग की अन्य परियोजनाओं की उम्र घट रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
सक्ती नगर के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा – “हम करदाता जनता हैं। पैसा जनता से जाता है, लेकिन आधा रास्ते में ही बंट जाता है। जब तक इस पर कड़ा एक्शन नहीं होगा, विकास का सपना अधूरा ही रहेगा।”
वहीं, एक ठेकेदार ने बताया कि “बिना दलालों को दिए काम नहीं होता। सिस्टम ऐसा बना दिया गया है कि मजबूरी में हमें खेल में शामिल होना पड़ता है।”
अधिकारियों की चुप्पी
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन मौन साधे हुए है। शिकायतें लगातार मिल रही हैं, लेकिन उच्च अधिकारियों की अनदेखी से यह गोरखधंधा और मजबूत होता जा रहा है।
संभावित समाधान
फाइलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कोई भी दलाल बीच में दखल न दे सके।
निर्माण कार्यों की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए।
स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन कर नियमित गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए।
दलालों और भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।




