सक्ती जिला

प्रशासन की मिलीभगत से रेत खनन जोरों पर, छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा महानदी की गोद सुनी, रात में चलता है ‘काला खेल’, “तरुण” के आगे नतमस्तक जिला प्रशासन

जिले में रेत नहीं बिकती, ईमान बिकता है

सक्ती। जिले में अवैध रेत खनन का खेल कलेक्टर और खनिज विभाग की मिलीभगत से खुलेआम चल रहा है। महानदी और उसकी सहायक नदियों से रात-दिन रेत की निकासी हो रही है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी ही मिलीभगत कर लें तो माफियाओं के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है।

महानदी की गोद हो रही सूनी

छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा कही जाने वाली महानदी का स्वरूप अवैध उत्खनन से बिगड़ गया है। जगह-जगह गहरे गड्ढे पड़ गए हैं और नदी की गोद सूनी हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी से रेत का लगातार उठाव न केवल पर्यावरण संकट बढ़ा रहा है, बल्कि भविष्य में बाढ़ और भू-क्षरण की भयावह स्थिति पैदा कर सकता है।

रात में होता है धंधा

अवैध खनन का सबसे बड़ा खेल आधी रात को होता है। ट्रैक्टर, डंपर और हाईवा नदी किनारे कतार में खड़े रहते हैं और मिनटों में रेत भरकर निकल जाते हैं। यह सब पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे होता है, लेकिन कार्रवाई का नाम तक नहीं लिया जाता।

तरुण के आगे नतमस्तक प्रशासन

जनचर्चा है कि “तरुण” के इशारे पर पूरा काम चलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन तरुण के आगे नतमस्तक है और इसी कारण खनन रोकने की बजाय आंख मूंदकर सबकुछ देख रहा है। यही वजह है कि खनन करने वालों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम शासन-प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं।

जनता का आक्रोश

लोगों का कहना है कि अवैध खनन से शासन को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है, लेकिन अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के चलते चुप्पी साधे हुए हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में सक्ती जिला अवैध रेत खनन का गढ़ बनकर रह जाएगा और धार्मिक नगरी की पहचान पूरी तरह धूमिल हो जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button