सक्ती जिलासक्ती नगर

किसानों के उग्र विरोध, चक्काजाम के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा, 60 प्रतिशत धान खरीदी का मौखिक तुगलकी फरमान वापस

— अब टोकन के अनुसार होगी पूर्ण धान खरीदी

सक्ती। धान खरीदी के अंतिम चरण में जिला प्रशासन द्वारा किसानों से केवल 60 प्रतिशत धान खरीदी किए जाने का मौखिक आदेश जिलेभर में भारी आक्रोश का कारण बन गया। वैध एवं क्रमवार टोकन होने के बावजूद जब किसानों से पूरा धान लेने से इनकार किया गया, तो स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई और कई धान खरीदी केंद्रों पर चक्काजाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई।

गणतंत्र दिवस के बाद भड़का किसानों का गुस्सा:-

गणतंत्र दिवस अवकाश के बाद अगली सुबह किसान अपने टोकन के अनुसार धान बेचने खरीदी केंद्रों पर पहुँचे। वहाँ प्रभारी अधिकारियों द्वारा यह कहे जाने पर कि पूरे जिले में केवल 60 प्रतिशत धान ही लिया जाएगा, किसान बुरी तरह आक्रोशित हो गए। किसानों का कहना था कि जब शासन ने टोकन जारी किए हैं, तो खरीदी में कटौती करना सीधा अन्याय है।

जिलेभर में ठप हुई धान खरीदी व्यवस्था
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60 प्रतिशत खरीदी के मौखिक फरमान से किसानों में भ्रम और असंतोष फैल गया। कई किसानों को अपनी पूरी उपज वापस ले जानी पड़ी। इससे धान खरीदी केंद्रों पर अफरा-तफरी मच गई और व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। कई स्थानों पर किसानों ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गईं।

कांग्रेस ने बताया किसान विरोधी फैसला:-

मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सक्ती ने प्रशासन के इस निर्णय को किसान विरोधी तुगलकी फरमान करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने किसानों के समर्थन में मोर्चा खोलते हुए कहा कि अंतिम चरण में इस तरह का आदेश किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने वाला है। कांग्रेस के समर्थन से किसानों का आंदोलन और तेज हो गया।

हालात बिगड़े तो प्रशासन ने लिया यू-टर्न :-

जैसे-जैसे विरोध बढ़ा और चक्काजाम की स्थिति बनने लगी, प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई। हालात को बिगड़ता देख अंततः जिला प्रशासन को अपना फैसला बदलना पड़ा और 60 प्रतिशत धान खरीदी के मौखिक आदेश को निरस्त कर पुनः पूर्ण धान खरीदी का निर्देश जारी करना पड़ा।

किसानों को राहत, पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल :-

फैसला वापस होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली और धान खरीदी केंद्रों पर धीरे-धीरे व्यवस्था सामान्य होने लगी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि अंत में पूरा धान ही खरीदना था, तो पहले 60 प्रतिशत खरीदी का आदेश देकर उन्हें क्यों परेशान किया गया। फिलहाल प्रशासन के आदेश बदलने से जिले के किसानों में संतोष है, लेकिन यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

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