जिले के खरीदी केंद्र में कहीं ताले, कहीं शराबियों का अड्डा; सिर्फ डभरा के देवरघटा में खरीदी शुरू

सक्ती। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आज विधिवत शुभारंभ भले हो गया हो, लेकिन सक्ती जिले की तस्वीर बेहद निराशाजनक रही। जिले के अधिकांश धान खरीदी केन्द्रों में न खरीदी की व्यवस्था दिखी, न अमला पहुँचा। कई केन्द्रों में ताले लटकते नजर आए, तो कई जगह परिसर शराबियों का अड्डा बन चुका था। मैदानों में गंदगी पसरी हुई थी, झाड़ू तक नहीं लगाया गया था, और खरीदी शुरू होने जैसी कोई तैयारी कहीं दिखाई नहीं दी। प्रशासन की उदासीनता और सहकारी कर्मचारियों की चल रही हड़ताल का असर सीधे तौर पर पहले ही दिन साफ नजर आया।
किसान सुबह से ही कई केन्द्रों में अपनी फसल की स्थिति जानने पहुँचे, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। किसी भी समिति का प्रतिनिधि मौके पर नहीं मिला। न तो धान तौलने की व्यवस्था तैयार थी और न खरीदी पर्ची या रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया। किसान इधर-उधर भटककर सिर्फ जानकारी लेने की कोशिश करते रहे, लेकिन प्रबंधन की कमी ने पहले ही दिन खरीदी कार्य को लगभग ठप कर दिया।
जिले में 95 ग्राम पंचायत सचिवों को खरीदी प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है, लेकिन अधिकांश सचिव केन्द्रों में उपस्थित नहीं हुए। उनकी बेरुखी ने खरीदी संचालन को और मुश्किल बना दिया है। सहकारी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जहां पूरी व्यवस्था पहले से ही अस्त-व्यस्त है, वहीं सचिवों की उदासीनता ने आने वाले दिनों में खरीदी पूरी तरह संकट में पड़ने की आशंका को और बढ़ा दिया है।
जिले के सभी केन्द्रों में खरीदी पूरी तरह ठप रही, लेकिन डभरा विकासखण्ड के देवरघटा केन्द्र में किसी तरह खरीदी कार्य शुरू हो सका, जो पूरे जिले में आज खरीदी शुरू होने का इकलौता उदाहरण रहा। बाकी सभी केन्द्रों की स्थिति जस की तस बनी रही।
किसानों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि धान खरीदी जैसे संवेदनशील और बड़े अभियान के पहले दिन ही प्रशासन कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सका। खेतों से फसल लाने की तैयारी कर चुके किसान अब असमंजस में हैं कि आखिर खरीदी कार्य सुचारु रूप से कब शुरू होगा। हड़ताल और अव्यवस्था का यह असर अगर ऐसे ही जारी रहा तो खरीदी का पूरा सीजन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सक्ती जिले में खरीदी की वास्तविक स्थिति –
- अधिकांश धान खरीदी केन्द्र बंद, कई जगह ताला
- परिसर में गंदगी, झाड़ू तक नहीं लगाया गया
- कई केन्द्र शराबियों के अड्डे में तब्दील
- न सचिव पहुंचे, न सहकारी कर्मचारी उपस्थित
- किसान भटकते रहे, खरीदी की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं
- पूरे जिले में सिर्फ देवरघटा (डभरा) में खरीदी प्रारंभ




