सक्ती क्राइम डायरी : “मैंने तेरी मां को मार दिया…” — बेटे को जगाकर कबूली हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

चरित्र शंका ने उजाड़ा घर, हंसिया से गला रेतकर पत्नी की बेरहमी से हत्या
सक्ती – थाना नगरदा क्षेत्र से सामने आए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पत्नी के चरित्र पर शक ने एक परिवार को तबाह कर दिया और अंततः आरोपी को उम्रकैद की सजा भुगतनी पड़ी। घटना 6 अप्रैल 2025 की रात की है। जब पूरा परिवार सो रहा था, तभी रात करीब 11:40 बजे आरोपी ठंडीराम उरांव ने अपने बेटे दिलहरण उरांव को जगाया और ठंडे स्वर में कहा— “तेरी मां को हंसिया से मार दिया…”। यह सुनते ही घर में हड़कंप मच गया। बेटा जब कमरे में पहुंचा तो मां फूलेश्वरी बाई खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी। गले के पीछे गहरे वार के निशान थे और हालत बेहद गंभीर थी। परिजनों ने आनन-फानन में इलाज के लिए ले जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
शक बना मौत की वजह :-
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लंबे समय से पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था और इसी बात को लेकर घर में अक्सर झगड़ा होता था। इसी शंका ने उसे इतना अंधा बना दिया कि उसने हंसिया उठाकर अपनी ही पत्नी की जान ले ली। घटना के बाद थाना नगरदा पुलिस ने मामला दर्ज कर तेजी से विवेचना शुरू की। पंचनामा, घटनास्थल निरीक्षण, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
13 गवाह, पुख्ता सबूत… और सख्त फैसला :-
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए। ठोस साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे ने 19 मार्च 2026 को आरोपी को बीएनएस की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।यह फैसला साफ करता है कि शक और गुस्से में किया गया अपराध भी कानून की नजर में उतना ही गंभीर है। घरेलू विवाद को हिंसा में बदलने वालों के लिए यह कड़ा संदेश है कि कानून से बचना नामुमकिन है।




