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सिंघीतराई वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद ठप, 1000 से अधिक परिवारों पर रोज़ी-रोटी का संकट

14 अप्रैल की भीषण दुर्घटना के बाद अनिश्चितकालीन बंदी, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

सक्ती। जिले के सिंघीतराई स्थित 1200 मेगावाट क्षमता वाले वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर हादसे के बाद से प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है। इस दर्दनाक दुर्घटना में 25 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक और भय का माहौल बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और तकनीकी खामियों की जांच जारी है। जब तक सभी आवश्यक सुरक्षा परीक्षण और प्रशासनिक मंजूरी पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्लांट संचालन शुरू होने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है। इसी के चलते प्रबंधन ने प्लांट को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है।

1000 से अधिक परिवारों पर संकट :-

प्लांट बंद होने से वहां कार्यरत मजदूरों, ठेका कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों, दुकानदारों और अन्य सेवा प्रदाताओं सहित करीब 1000 से अधिक परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। जिन लोगों की रोज़ी-रोटी पूरी तरह इस प्लांट पर निर्भर थी, वे आज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर :-

सिंघीतराई और आसपास के क्षेत्रों में छोटे व्यापार, होटल-ढाबे, परिवहन सेवाएं और किराना दुकानों की आय में भारी गिरावट देखी जा रही है। बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं है और आर्थिक गतिविधियां लगभग ठहर सी गई हैं।

परिवारों की बढ़ती चिंता :-

प्रभावित परिवारों के सामने अब रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा और घरेलू जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन गया है। कई मजदूरों ने बताया कि उनके पास वैकल्पिक रोजगार का कोई साधन नहीं है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

स्पष्ट जानकारी का अभाव, बढ़ी बेचैनी :-

प्लांट दोबारा कब शुरू होगा, इसे लेकर अब तक कोई ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है। मरम्मत कार्य, सुरक्षा ऑडिट और प्रशासनिक अनुमति के बाद ही संचालन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इसकी अवधि अनिश्चित बनी हुई है।

राहत और रोजगार की मांग तेज :-

स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने प्रशासन एवं कंपनी प्रबंधन से प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज, मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक प्लांट चालू नहीं होता, तब तक सरकार और प्रबंधन को मिलकर श्रमिकों की मदद करनी चाहिए।

सबकी निगाहें दोबारा संचालन पर :-

फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि प्लांट कब तक दोबारा शुरू होगा। प्लांट के पुनः चालू होने से ही न केवल रोजगार के अवसर लौटेंगे, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। हादसे के बाद उठे सवाल और आजीविका पर मंडराता संकट—सिंघीतराई के सैकड़ों परिवारों की उम्मीदें अब प्लांट के पुनः संचालन पर टिकी हैं।

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