‘आरोग्य परियोजना’ से बदली ग्रामीण स्वास्थ्य की तस्वीर: वेदांता पावर ने 1500 जरूरतमंदों को दी मुफ्त इलाज की सौगात, 7000 से अधिक लोगों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

सक्ती, 1 मई। ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने की दिशा में वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट (व्हीएलसीटीपीपी) द्वारा संचालित ‘आरोग्य परियोजना’ एक प्रभावी और भरोसेमंद पहल बनकर उभरी है। सिंघीतराई, ओड़ेकेरा और निमोही जैसे गांवों में चलित स्वास्थ्य इकाई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का जो विस्तार हुआ है, उसने हजारों ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस परियोजना के तहत अब तक करीब 1500 जरूरतमंद ग्रामीणों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सेवाओं में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच, स्वास्थ्य परामर्श, जरूरी दवाइयों का वितरण और बीमारियों की प्रारंभिक पहचान शामिल है। इस पहल का संचालन स्वयंसेवी संस्था पीएचडी रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन, नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है, जो इसे और अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बना रहा है।
गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवा, बढ़ी जागरूकता
चलित स्वास्थ्य इकाई का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाना है जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित या लगभग नगण्य हैं। नियमित रूप से निर्धारित स्थानों पर लगने वाले स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से अब तक लगभग 7000 लोगों को लाभ मिल चुका है। इससे न केवल लोगों को इलाज मिला है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता भी बढ़ी है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण प्रभाव यह भी देखने को मिला है कि ग्रामीण अब झोला-छाप और अप्रमाणित नीम-हकीमों के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टरों की सेवाएं लेने लगे हैं। इससे गलत इलाज की संभावना में कमी आई है और लोगों का भरोसा व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ा है।
मधुमेह, ब्लड प्रेशर और एनीमिया की जांच, मुफ्त दवाइयां
चलित स्वास्थ्य इकाई में एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, खून की कमी (एनीमिया) जैसी बीमारियों की जांच करता है। इसके साथ ही सामान्य बीमारियों के लिए निःशुल्क दवाइयां भी दी जाती हैं।
शिविरों में ग्रामीणों को पोषण, स्वच्छता और रोगों की रोकथाम के उपायों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाती है, जिससे वे खुद और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकें।
शहर जाने की जरूरत घटी, समय और पैसे की बचत
पहले छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को शहरों की ओर जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। अब गांव में ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इससे बड़ी राहत मिली है।
प्रबंधन का बयान: स्वस्थ भारत के लिए प्रतिबद्ध
वेदांता पावर बिजनेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजिंदर सिंह आहूजा ने कहा कि कंपनी ‘स्वस्थ भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और समाज के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
व्हीएलसीटीपीपी के मुख्य प्रचालन अधिकारी देवेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि इस पहल से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को व्यापक लाभ मिल रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
ग्रामीणों ने की सराहना, बताया वरदान
ग्राम पंचायत सिंघीतराई के सरपंच प्रतिनिधि घुरवा राम सिदार ने वेदांता पावर के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
ओड़ेकेरा और निमोही के जनप्रतिनिधियों ने भी बताया कि गांव में ही शिविर लगने से लोगों को आवागमन की परेशानी से मुक्ति मिली है और समय पर इलाज संभव हो पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आसानी से पैदल ही शिविर तक पहुंचकर इलाज करा लेते हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष लाभ मिल रहा है, जिससे गांवों में स्वास्थ्य स्तर में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण स्वास्थ्य के क्षेत्र में बनी मिसाल
‘आरोग्य परियोजना’ न केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि यह ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है। वेदांता पावर की यह पहल अन्य औद्योगिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।




