सक्ती के जे.एल.एन. डिग्री कॉलेज में नई शिक्षा नीति पर प्रभावशाली कार्यशाला, परीक्षा प्रणाली से लेकर कौशल आधारित शिक्षा तक हर पहलू पर हुआ विस्तार से संवाद, विद्यार्थियों को मिली स्पष्ट दिशा और आत्मविश्वास

सक्ती : बदलते शैक्षणिक परिदृश्य में विद्यार्थियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से स्थानीय जे.एल.एन. डिग्री कॉलेज सक्ती में 04 मई 2026 को आयोजित एक दिवसीय एनईपी (नई शिक्षा नीति) जागरूकता कार्यशाला बेहद प्रभावशाली और मार्गदर्शक साबित हुई। स्नातक द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के नियमित एवं स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह शिक्षण, संवाद और समझ पर केंद्रित रहा। प्राचार्य डॉ. शालू पाहवा, एनईपी नोडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र शुक्ला, समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इस अवसर पर उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. देवेंद्र शुक्ला ने नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को अत्यंत सरल, स्पष्ट और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एनईपी केवल शिक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने परीक्षा पद्धति में आए बदलाव, आंतरिक मूल्यांकन, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट वर्क, सतत मूल्यांकन प्रणाली एवं नियमित उपस्थिति के महत्व को विस्तार से समझाया।
डॉ. शुक्ला ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि अब केवल अंतिम परीक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे सत्र में उनकी सक्रियता, भागीदारी और निरंतर अध्ययन ही उनके परिणाम को निर्धारित करेगा। उन्होंने नई शिक्षा नीति के तहत विषय चयन में मिली लचीलापन को विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर बताते हुए कहा कि विद्यार्थी अपनी रुचि और लक्ष्य के अनुरूप विषयों का चयन कर सकते हैं, जिससे उनका भविष्य अधिक सुदृढ़ बनेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. शालू पाहवा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, कुशल और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, अनुशासन बनाए रखने और हर अवसर का लाभ उठाने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की हर शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्या के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहेगा।
इस अवसर पर प्रो. अजीत जॉन ने एईसी (AEC) परीक्षा प्रणाली को विस्तारपूर्वक समझाते हुए बताया कि यह प्रणाली विद्यार्थियों के कौशल विकास, संप्रेषण क्षमता और व्यवहारिक ज्ञान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने परीक्षा संरचना, अंक विभाजन और मूल्यांकन प्रक्रिया की बारीकियों को भी सरल भाषा में स्पष्ट किया।
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी। छात्र-छात्राओं ने खुले मन से अपने प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया। इससे न केवल उनकी शंकाएं दूर हुईं, बल्कि उनके भीतर नई शिक्षा नीति को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा।
कार्यक्रम के समापन पर यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए जागरूकता, अनुशासन और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी हैं। महाविद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को सही दिशा देने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।




