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धान खरीदी में 89 लाख की कथित गड़बड़ी से हड़कंप! ऑनलाइन रिकॉर्ड में 32,720 बोरे, मौके पर सिर्फ 23,294 मिले—9426 बोरे का हिसाब गायब, अब तीन और लोगों के नाम एफआईआर में जोड़ने के निर्देश, पुटीडीह धान उपार्जन केंद्र का मामला : संयुक्त जांच में संस्था प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और समिति के प्राधिकृत अधिकारी की भूमिका संदिग्ध, पहले एक के खिलाफ दर्ज थी एफआईआर

सक्ती। जिले के डभरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पुटीडीह धान उपार्जन केंद्र में वर्ष 2025-26 के दौरान हुई धान खरीदी में सामने आई कथित बड़ी अनियमितता ने सहकारिता विभाग से लेकर पुलिस महकमे तक हलचल पैदा कर दी है। ऑनलाइन खरीदी पोर्टल पर दर्ज धान के स्टॉक और मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन में भारी अंतर सामने आने के बाद 9426 नग धान भरे बारदानों की कमी पाई गई है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार इस कमी से शासन/समिति को 89 लाख 32 हजार 77 रुपये 60 पैसे की आर्थिक क्षति होना बताया गया है।

मामले में प्रारंभिक तौर पर धान खरीदी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के बाद अब कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। सहकारिता विभाग ने पूर्व में दर्ज एफआईआर में प्रभारी संस्था प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और समिति की प्राधिकृत अधिकारी के नाम भी नियमानुसार शामिल कराने के निर्देश दिए हैं।

ऑनलाइन पोर्टल पर 32,720 बोरे, भौतिक सत्यापन में मिले सिर्फ 23,294

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 जनवरी 2026 को किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान ऑनलाइन खरीदी पोर्टल पर धान से भरे 32,720 बारदानों का स्टॉक दर्ज था। वहीं, जब मौके पर वास्तविक स्टॉक का सत्यापन किया गया तो मात्र 23,294 धान भरे बारदाने ही पाए गए।

इस तरह ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध स्टॉक के बीच 9426 बारदानों का भारी अंतर सामने आया। इतनी बड़ी मात्रा में धान भरे बारदानों की कमी ने उपार्जन केंद्र में स्टॉक प्रबंधन और रिकॉर्ड संधारण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच प्रतिवेदन में इस कमी के चलते शासन/समिति को 89,32,077.60 रुपये की आर्थिक क्षति होना बताया गया है।

पहले धान खरीदी प्रभारी के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर

धान भरे बारदानों की कमी सामने आने के बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर धान खरीदी प्रभारी प्रकाश महंत के खिलाफ थाना डभरा में अपराध क्रमांक 0023 दर्ज किया गया था। इसके बाद मामले की वास्तविक स्थिति, स्टॉक में कमी और जिम्मेदारी तय करने के लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया गया।

संयुक्त जांच दल ने अपनी जांच में मामले से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया। जांच प्रतिवेदन में प्रभारी संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत, कंप्यूटर ऑपरेटर द्रोण प्रताप शांडिल्य तथा समिति पुटीडीह की प्राधिकृत अधिकारी श्याम बाई की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने का उल्लेख किया गया है।

संयुक्त जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ा कार्रवाई का दायरा

संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सक्ती ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर की डभरा शाखा के शाखा प्रबंधक को पत्र जारी किया। इसमें पूर्व में दर्ज अपराध क्रमांक 0023 में उक्त तीनों के नाम नियमानुसार संबंधित धाराओं के तहत शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके बाद डभरा शाखा के शाखा प्रबंधक ने भी थाना प्रभारी डभरा को पत्र भेजकर अपराध क्रमांक 23/2026 में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत तीनों के नाम शामिल करने की मांग की है।

9426 बोरे का अंतर, 89 लाख की क्षति और अब कई सवाल

धान खरीदी केंद्र में ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध स्टॉक में 9426 बोरे का अंतर सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और वास्तविक भौतिक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? स्टॉक की निगरानी और रिकॉर्ड संधारण की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी? क्या धान भरे बारदानों के आवक-जावक का उचित हिसाब रखा गया था? इन तमाम सवालों का जवाब अब पुलिस जांच में तलाशा जाएगा।

वहीं, सहकारिता विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट के बाद तीन और लोगों के नाम एफआईआर में शामिल कराने के निर्देश दिए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस जांच के दौरान धान खरीदी केंद्र की पूरी प्रक्रिया, स्टॉक का संधारण, ऑनलाइन प्रविष्टियां, भौतिक उपलब्धता और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा सकती है।

पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं और भी तथ्य

करीब 89 लाख रुपये की आर्थिक क्षति और 9426 धान भरे बारदानों की कमी से जुड़े इस मामले में अब पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है। एफआईआर में नए नाम शामिल किए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ेगा और यह स्पष्ट होने की संभावना है कि स्टॉक में इतनी बड़ी कमी किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुई।

फिलहाल, पुटीडीह धान उपार्जन केंद्र में सामने आई इस कथित बड़ी अनियमितता ने जिले की सहकारी संस्थाओं में स्टॉक प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सहकारिता विभाग के निर्देश के बाद अब इस मामले में आगे होने वाली पुलिस कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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