सक्ती नगर

रैनखोल का स्कूल भगवान भरोसे, शिक्षकों का कोरोनाकाल के अवकाश से भी नहीं भरा मन

खेल कूद कर समय व्यतीत कर रहे हैं बच्चे

सक्ती। आदिवासी बाहुल्य ग्राम रैन खोल में शिक्षा की धज्जियां उड़ाई जा रही है। 2 शिक्षकों की पदस्थापना वाला प्राथमिक विद्यालय शिक्षक विहीन हो गया है बच्चे वीडियो के माध्यम से बता रहे हैं कि शिक्षकों की अनुपस्थिति से वे खेलने कूदने में अपना दिन बिता रहे हैं। पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है। शिक्षा का नया सत्र प्रारंभ हुए माह भर होने जा रहे हैं लेकिन शिक्षकों की लापरवाही ने शिक्षा व्यवस्था का बेड़ा गर्क कर रखा है।  मामला सामने आया है आदिवासी बाहुल्य ग्राम रैन खोल से जहां के शिक्षक स्कूल को भगवान भरोसे छोड़कर कई कई दिनों तक नदारद रहते हैं। मामला जब उच्चाधिकारियों की जानकारी में पहुंचा तो जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्यवाही करने की बात कही है। 

कोरोना काल में वैसे भी पढ़ाई को प्रभावित हुए 2 वर्ष से अधिक हो गए हैं ऐसे में आराम कर के शिक्षकों का मन नहीं भरा है और शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के बावजूद शिक्षकों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक ग्रामीण ने शिक्षकविहीन स्कूल में पहुंचकर बच्चों से हाल जाना तो बच्चों ने बताया कि विगत तीन दिनों से पदस्थ दोनों शिक्षक स्कूल नहीं आ रहे हैं और वे बिना पढ़ाई किए केवल खेलकूद करके अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे गैर जिम्मेदार शिक्षकों पर कठोर कार्यवाही करने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा का महत्व कितना है इसका एहसास हो सके। 

विद्यालय में बच्चों ने बताया कि उनके पदस्थ दोनों शिक्षक खर्री पार तथा गूंजी से आना-जाना करते हैं लेकिन विगत 3 दिनों से वे स्कूल नहीं आ रहे हैं जिस कारण पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक कलेश्वर एवं संतोष की यहां पदस्थापना है। दोनों शिक्षकों की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। जहां कई बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य ग्राम रैन खोल के ग्रामीण भी यहां की शिक्षा व्यवस्था से नाखुश हैं और वे ऐसे शिक्षकों पर कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। 

लंबे अरसे बाद प्रारंभ हो सका था विद्यालय-

सक्ती विकासखंड के ग्राम रेन खोल को यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां अन्य गांवों से अलग बनाती है। चारों और पहाड़ियों से घिरा यह गांव शिक्षा के लिहाज से काफी पिछड़ा हुआ था यहां के लोगों को पढ़ाई के लिए पहाड़ पार करके ऋषभ तीर्थ आना पड़ता था।  केवल पढ़ाई करने के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। शासन ने इस गांव के उद्धार के लिए विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वयन किया लेकिन आज यह गांव शासन प्रशासन की नजर से दूर होता हुआ नजर आ रहा है। लापरवाह शिक्षकों पर जब तक सख्त कार्यवाही नहीं होगी तब तक यहां की शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार होता हुआ नजर नहीं आएगा। ग्रामीणों ने कहा कि यहां योग्य और मेहनतकश शिक्षकों की आवश्यकता है ताकि आदिवासी बाहुल्य यह गांव शिक्षा के क्षेत्र में अग्रसर हो सके।  

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पदस्थ 2 शिक्षकों की अनुपस्थिति की जानकारी प्राप्त हुई है। मामले की जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।

बीएल खरे

जिला शिक्षा अधिकारी

शैक्षणिक जिला सक्ती

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