‘मन की बात’ से प्रेरित होकर सक्ती में हुआ पौधरोपण

पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी अपनाने का दिया संदेश
सक्ती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 26 जुलाई 2026 के प्रसारण से प्रेरित होकर भारतीय जनता पार्टी ओबीसी मोर्चा नगर मंडल सक्ती द्वारा वार्ड क्रमांक 05 स्थित शासकीय अस्पताल के पास पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से देशवासियों से आत्मनिर्भर होकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा देने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बनेगा।
‘एक पेड़ मां के नाम, एक पेड़ देश के नाम’ के तहत लगाए पौधे :-
प्रधानमंत्री के पर्यावरण संरक्षण के संदेश से प्रेरित होकर कार्यक्रम में ‘एक पेड़ मां के नाम, एक पेड़ देश के नाम’ अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने पौधों की नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक डॉ. खिलावन साहू, गोविंद देवांगन, ओबीसी मोर्चा मंडल अध्यक्ष रघुनंदन राठौर, मंडल उपाध्यक्ष सुरेंद्र यादव (मुनु), अनुसूचित जाति मोर्चा नगर अध्यक्ष रामसिंह सिदार, मंत्री भुवन लाल सोनी, सोशल मीडिया प्रभारी संपत साहू, मीडिया प्रभारी बंशी देवांगन, पूर्व विधायक प्रतिनिधि सत्येंद्रनाथ सोनी, विष्णुदास महंत, मनोज सोनी, प्रेम सिंह प्रधान, लालू यादव, दर्शन यादव, सुशीला श्रीवास, उर्मिला यादव, बसंती महंत, सावित्री महंत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संदेश प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। पौधरोपण को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।




