सक्ती-चांपा मार्ग से गायब हुए ट्रक, छोटे कारोबार पर बड़ा संकट

सक्ती। कभी दिन-रात ट्रकों की गड़गड़ाहट से गूंजने वाला सक्ती-चांपा राष्ट्रीय राजमार्ग 49 (NH-49) इन दिनों कुछ वीरान नजर आ रहा है। 20 मार्च 2026 से भारी वाहनों की आवाजाही में आई अचानक गिरावट ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को झकझोर कर रख दिया है। सबसे ज्यादा मार सक्ती क्षेत्र के ढाबा संचालकों, छोटे व्यापारियों और सड़क किनारे रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों पर पड़ी है। जानकारी के अनुसार, रायगढ़ स्थित बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों— से माल ढुलाई के कार्य आदेश पूरी तरह बंद हो गए हैं। इन उद्योगों से ट्रांसपोर्ट रुकते ही NH-49 पर ट्रकों की संख्या में भारी कमी आ गई।
डायवर्जन ने तोड़ी सक्ती की कमर :-
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए खरसिया से कोरबा जाने वाले भारी वाहनों का सीधा डायवर्जन कर दिया गया है। इससे ट्रक चालक अब सक्ती मार्ग को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे सक्ती-चांपा खंड पर यातायात लगभग ठप हो गया है।
ट्रांसपोर्टरों ने भी बनाया दूरी :-
ट्रक एवं ट्रेलर एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार चंद्रा का कहना है कि सक्ती होकर कोरबा जाने वाला मार्ग अब परिवहन के लिए लाभकारी नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि— ईंधन की बढ़ती लागत, कंक्रीट सड़कों पर अधिक घिसावट उद्योगों से काम बंद होना, इन कारणों से ट्रांसपोर्टर अब सस्ते और छोटे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर रहे हैं।
ढाबों में सूना पड़ा तंदूर, विक्रेताओं की बढ़ी चिंता :-
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर सक्ती-चांपा मार्ग पर स्थित ढाबा संचालकों और छोटे विक्रेताओं पर पड़ा है। जहां पहले दिनभर ट्रकों की भीड़ रहती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। रोजाना की आमदनी लगभग खत्म हो गई है। कई छोटे ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि “पहले जहां सैकड़ों ट्रक रुकते थे, अब दिनभर में गिनती के वाहन ही दिखते हैं।”
आजीविका पर संकट, भविष्य अनिश्चित :-
ईंधन की बढ़ती कीमतों और ग्राहकों की कमी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। कई लोग कर्ज में डूब रहे हैं, तो कुछ अपने व्यवसाय बंद करने पर मजबूर हो गए हैं। फिलहाल स्थिति में सुधार की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है। स्थानीय व्यापारियों और ढाबा संचालकों की उम्मीद अब केवल इस बात पर टिकी है कि जब रायगढ़ के उद्योगों में फिर से काम शुरू होगा, तभी NH-49 पर ट्रकों की आवाजाही लौटेगी और सक्ती की आर्थिक धड़कन फिर से तेज होगी।




