भाजपा का ‘संगठन मॉडल’ चांपा में फेल! मंत्री समेत बड़े नेताओं को स्थानीय कार्यकर्ताओं ने किया नजरअंदाज

विश्राम गृह में 2 घंटे तक करते रहे इंतजार, नगर मंडल का कोई जिम्मेदार नेता पहुंचना तक नहीं समझा जरूरी
जांजगीर-चांपा। भारतीय जनता पार्टी के “संगठन सबसे ऊपर” वाले दावों की पोल मंगलवार को चांपा में उस वक्त खुलती नजर आई, जब प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, विधायक और भाजपा के बड़े पदाधिकारी शहर के विश्राम गृह में करीब दो घंटे तक मौजूद रहे, लेकिन चांपा भाजपा मंडल का कोई जिम्मेदार नेता वहां पहुंचना तक जरूरी नहीं समझा।
दोपहर करीब 3 बजे से 5 बजे तक कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक अनुज शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष अंबेश जांगड़े और भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा चांपा विश्राम गृह में मौजूद रहे। वहीं, इतनी बड़ी राजनीतिक मौजूदगी के बावजूद चांपा भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित स्थानीय संगठन के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि पूरी तरह नदारद रहे।
यह घटना अब केवल अनुपस्थिति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान, गुटबाजी और संवादहीनता का खुला संकेत माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस संगठन में छोटे कार्यक्रमों तक के लिए कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाई जाती है, वहां मंत्री और विधायक के आगमन पर स्थानीय संगठन का पूरी तरह गायब रहना क्या दर्शाता है?
जब इस मामले में चांपा मंडल अध्यक्ष संतोष थवाईत से संपर्क किया गया तो उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए विश्राम गृह नहीं पहुंच पाने की बात कही। लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही देर बाद वे चांपा नगर में ही दिखाई दिए। इससे उनकी सफाई पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
वहीं भाजपा के ही एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि न तो संगठन स्तर पर कोई आधिकारिक सूचना दी गई और न ही व्यक्तिगत रूप से किसी को अवगत कराया गया। ऐसे में स्थानीय नेताओं का नहीं पहुंचना स्वाभाविक है। इस बयान ने भाजपा संगठन के अंदर समन्वय की स्थिति को और उजागर कर दिया।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि जांजगीर से भाजपा नेता विश्राम गृह पहुंच गए, लेकिन चांपा भाजपा का पूरा ढांचा गायब रहा। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या चांपा संगठन अपने ही क्षेत्र में हो रहे कार्यक्रमों से कटा हुआ है या फिर जानबूझकर दूरी बनाई जा रही है।
हालांकि, कुछ युवा मोर्चा पदाधिकारी जरूर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा के आगमन की जानकारी मिलने पर वे जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में विश्राम गृह पहुंचे थे। लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी स्थानीय संगठन की बड़ी गैरमौजूदगी को छिपा नहीं सकी।
इस घटनाक्रम ने भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्री, विधायक और जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में स्थानीय संगठन इस तरह गायब रहता है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व संकट का संकेत है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चांपा संगठन की इस राजनीतिक बेरुखी पर संज्ञान लेगा, या फिर अंदरूनी गुटबाजी के बीच स्थानीय इकाई यूं ही अपने ही नेताओं से दूरी बनाकर चलती रहेगी।




