प्रतिबंधित बीएस-3 इंजन वाला हार्वेस्टर बेचने पर कंपनी दोषी, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

सक्ती। ग्राम बड़े सीपत निवासी किसान कृष्णा साहू को प्रतिबंधित बीएस-3 इंजन वाला हार्वेस्टर बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने भोपाल स्थित मेसर्स सत करतार एग्रो इंजीनियरिंग कंपनी को सेवा में गंभीर कमी, अनुचित व्यापार पद्धति एवं उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी का दोषी मानते हुए किसान के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसान कृष्णा साहू ने खेती-किसानी कार्य हेतु मेसर्स सत करतार एग्रो इंजीनियरिंग कंपनी, भोपाल से AMAN955 SELF PROPELLED COMBINE HARVESTER लगभग 22 लाख 50 हजार रुपए में खरीदा था। आरोप है कि कंपनी ने कई वर्षों तक हार्वेस्टर का पंजीयन एवं आरसी कार्ड उपलब्ध नहीं कराया। बाद में कृष्णा साहू को जानकारी मिली कि हार्वेस्टर में प्रतिबंधित बीएस-3 श्रेणी का इंजन लगाया गया है, जिसका विक्रय नियमानुसार प्रतिबंधित है।
किसान का आरोप था कि कंपनी के प्रोपराइटर गुरुचरण सिंह एवं मैनेजर अमनप्रीत सिंह ने वास्तविकता छिपाकर हार्वेस्टर की बिक्री की। शिकायत के बाद कंपनी प्रबंधन ने बीएस-4 इंजन लगाने और पुनः पंजीयन कराने का आश्वासन दिया, लेकिन वर्षों तक केवल टालमटोल किया गया।
इसके बाद कृष्णा साहू ने अधिवक्ता साकेत केसरवानी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर में परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 23 मार्च 2026 को आदेश पारित करते हुए कंपनी को दोषी ठहराया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी ने 20 अक्टूबर 2022 को प्रतिबंधित बीएस-3 इंजन वाला हार्वेस्टर वास्तविक स्थिति छिपाकर बेचा, जो स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार एवं सेवा में गंभीर कमी को दर्शाता है।
आयोग के प्रमुख आदेश
कंपनी 45 दिनों के भीतर हार्वेस्टर में लगा बीएस-3 इंजन हटाकर नया बीएस-4 इंजन नि:शुल्क लगाए।
यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो कंपनी किसान को हार्वेस्टर की पूरी कीमत 22.50 लाख रुपए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए।
मानसिक एवं शारीरिक क्षति के लिए 1 लाख रुपए क्षतिपूर्ति दे।
परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए का भुगतान करे।
आदेश की अवहेलना होने पर समस्त राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अतिरिक्त देय होगा।
इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्र के किसानों में भी इस निर्णय को लेकर चर्चा है और इसे उपभोक्ताओं के हित में बड़ा संदेश माना जा रहा है।




