सक्ती जिला

पीएम आवास योजना में बड़े घोटाले का आरोप, 700 गरीब परिवारों से वसूली का मामला गरमाया

सक्ती। जिले के बाराद्वार नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि भाजपा नेताओं और पटवारी की मिलीभगत से सरकारी जमीन के नक्शों में छेड़छाड़ कर शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण की तैयारी की जा रही थी। साथ ही पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 700 गरीब परिवारों से मोटी रकम वसूले जाने की शिकायत भी सामने आई है।


मामले की शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने तत्काल सख्ती दिखाते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है तथा पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है। डिप्टी कलेक्टर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।


गरीबों के सपनों से खिलवाड़ का आरोप
बाराद्वार नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ पार्षद और हल्का पटवारी मिलकर गरीब परिवारों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम आवास योजना के नाम पर लोगों से भारी रकम वसूली जा रही है और फर्जी दस्तावेज तैयार कर आवास स्वीकृत कराने की प्रक्रिया चलाई जा रही है।


उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को कुछ लोग कमाई का जरिया बना चुके हैं और गरीब परिवारों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कई परिवारों को यह तक जानकारी नहीं है कि आगे चलकर उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


कलेक्टर से की गई शिकायत
नेता प्रतिपक्ष द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में कहा गया है कि शासन के नियमों के अनुसार आबादी भूमि पर निवासरत पात्र हितग्राहियों को अधिकार पत्र जारी कर पीएम आवास योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। लेकिन नगर पंचायत के कुछ अधिकारी-कर्मचारी कथित रूप से घास भूमि पर रहने वाले लोगों से पैसे लेकर फर्जी तरीके से आवास स्वीकृत कराने की तैयारी कर रहे हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में हल्का पटवारी रमेंद्र राठौर की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि उन्होंने मौके का निरीक्षण किए बिना ही कार्यालय में बैठकर दस्तावेज तैयार कर दिए, जबकि नियमानुसार संबंधित मकानों का जियो टैग और भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।


प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने संबंधित पटवारी को निलंबित कर जांच के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम अब पूरे मामले की परतें खंगालने में जुट गई है।


यह मामला सामने आने के बाद नगर पंचायत क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है तथा गरीब हितग्राहियों में भी चिंता का माहौल है।

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