सपोस में उर्वरक कारोबारी पर बड़ी कार्रवाई, दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली

21 दिनों के लिए बिक्री पर लगी रोक
सक्ती। जिले में उर्वरकों की असामान्य बिक्री, कालाबाजारी एवं जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी और जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला एवं विकासखंड स्तरीय जांच दल ने विकासखंड डभरा के ग्राम सपोस स्थित उर्वरक विक्रेता मैसर्स श्री हनुमान ट्रेडिंग कंपनी के प्रतिष्ठान का आकस्मिक निरीक्षण किया, जहां दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में उर्वरक मिला, दस्तावेजों में मिली कमी: –
जांच के दौरान प्रतिष्ठान में जिंकेटेड एस.एस.पी. दानेदार 224 बोरी (11.200 मीट्रिक टन), जिंकेटेड एस.एस.पी. पाउडर 450 बोरी (22.500 मीट्रिक टन) तथा जिंकेटेड-बोरोनेटेड एस.एस.पी. दानेदार 122 बोरी (6.100 मीट्रिक टन) सहित कुल 39.800 मीट्रिक टन उर्वरक पाया गया। निरीक्षण के समय संबंधित उर्वरकों के संबंध में स्पष्ट बिल-वाउचर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके अलावा फर्म द्वारा उर्वरकों के जुड़वाने एवं भंडारण से जुड़े आवश्यक अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
21 दिनों तक बिक्री पर प्रतिबंध, सात दिन में मांगे गए दस्तावेज :-
प्रथम दृष्टया मामला संदेहास्पद पाए जाने पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए विकासखंड डभरा के उर्वरक निरीक्षक द्वारा संबंधित उर्वरकों की बिक्री पर 21 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही फर्म संचालक को सात दिनों के भीतर सभी आवश्यक एवं स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर होगी सख्त कार्रवाई :-
कृषि विभाग ने जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं एवं भंडारणकर्ताओं को चेतावनी दी है कि बिना वैध लाइसेंस और आवश्यक दस्तावेजों के उर्वरकों का भंडारण, परिवहन अथवा विक्रय न करें। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से उर्वरकों का भंडारण कर कालाबाजारी करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदारी करने की अपील :-
विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें और प्रत्येक खरीद पर पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता, कालाबाजारी या अवैध बिक्री की जानकारी तत्काल विकासखंड कृषि कार्यालय अथवा संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को देकर कार्रवाई में सहयोग करें।




