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10 मिनट की आंधी-पानी में ध्वस्त हुई सक्ती की बिजली व्यवस्था: कई मोहल्लों में घंटों ब्लैक आउट, उमस और गर्मी से बिलबिलाई जनता

सक्ती। नगर में बुधवार शाम चली महज 10 मिनट की आंधी और हल्की बारिश ने बिजली विभाग की तैयारियों और दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी। मामूली मौसम बिगड़ते ही शहर के कई मोहल्लों में बिजली गुल हो गई और घंटों बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके। गर्मी और उमस के बीच लोग पूरी रात परेशान होते रहे, जबकि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर जनता का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है।
हल्की आंधी में ही बैठ गया पूरा सिस्टम
नगरवासियों का कहना है कि यह कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि सामान्य आंधी और हल्की बारिश थी। इसके बावजूद जिस तरह बिजली व्यवस्था ध्वस्त हुई, उसने पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया। कई इलाकों में बार-बार ट्रिपिंग होती रही, जबकि अनेक मोहल्लों में पूरी तरह ब्लैक आउट की स्थिति बनी रही।
लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि अब सक्ती में बिजली सुविधा नहीं, बल्कि “किस्मत” बन चुकी है — कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं।


गर्मी और मच्छरों ने लोगों का किया बुरा हाल
बिजली गुल होते ही घरों के पंखे, कूलर और अन्य उपकरण बंद हो गए। उमस भरी गर्मी में लोग पसीने से तरबतर हो गए। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब रही। रात बढ़ने के साथ मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता गया और लोग अंधेरे में परेशान होकर बिजली आने का इंतजार करते रहे।
कई परिवारों ने छतों और घरों के बाहर बैठकर रात गुजारी। लोगों का कहना था कि बिजली कटौती अब आम समस्या बन चुकी है, लेकिन विभाग इसे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं दिख रहा।


मेंटेनेंस के दावों पर उठे बड़े सवाल
हर साल गर्मी और मानसून से पहले बिजली विभाग द्वारा लाइन सुधार, मेंटेनेंस और व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज हवा और हल्की बारिश में ही ये दावे धराशायी हो जाते हैं। नगरवासियों ने सवाल उठाया कि यदि केवल 10 मिनट की आंधी में शहर अंधेरे में डूब जाता है तो आने वाले मानसून में हालात कितने भयावह होंगे। लोगों का कहना है कि विभाग केवल कागजों में सुधार दिखा रहा है, जबकि जमीनी स्थिति बेहद खराब है।


कुछ मिनट बिजली, फिर दोबारा अंधेरा
कई मोहल्लों में बिजली कुछ देर के लिए आई, लेकिन राहत ज्यादा देर टिक नहीं सकी। कुछ ही मिनटों बाद फिर सप्लाई बंद हो गई। लगातार ट्रिपिंग से लोग और अधिक परेशान हो उठे। मोबाइल चार्जिंग से लेकर पेयजल व्यवस्था तक प्रभावित रही। दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हुई और रातभर लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी बनी रही।


जनता पूछ रही — आखिर जवाबदेह कौन?


लंबे समय तक बिजली बाधित रहने के बावजूद लोगों को यह जानकारी तक नहीं मिल सकी कि फॉल्ट कहां हुआ है और सप्लाई कब तक बहाल होगी। इससे लोगों में और अधिक आक्रोश देखने को मिला। नगरवासियों का कहना है कि हर बार मौसम खराब होने पर यही स्थिति बन जाती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी स्थायी समाधान निकालने की बजाय अस्थायी मरम्मत में ही लगे रहते हैं।


व्यवस्था सुधारने की उठी मांग
नगर के लोगों ने मांग की है कि बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गंभीर और स्थायी कदम उठाए जाएं। जर्जर लाइनों और उपकरणों को बदला जाए तथा ट्रिपिंग की समस्या पर तत्काल नियंत्रण किया जाए, ताकि हर हल्की आंधी और बारिश में सक्ती नगर को अंधेरे में डूबने से बचाया जा सके।

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