सक्ती: खेलते-खेलते तालाब की गहराई में समा गईं जुड़वा मासूम बच्चियां, लवसरा गांव में गूंज रही मातम की चीखें, गहरे पानी ने छीन ली जिंदगी—एक पल में उजड़ गया परिवार

सक्ती। खेलते-खेलते हंसती-मुस्कुराती दो मासूम जिंदगियां पलभर में हमेशा के लिए खामोश हो गईं। बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम लवसरा में हुई इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। हर आंख नम है, हर चेहरा स्तब्ध।
बताया जा रहा है कि 6 वर्षीय जुड़वा बच्चियां रोज की तरह बैगिन तालाब में नहाने गई थीं। मासूमियत भरे खेल के बीच उन्हें क्या पता था कि यह खेल उनकी जिंदगी का आखिरी पल बन जाएगा। खेलते-खेलते वे कब गहरे पानी में चली गईं, किसी को भनक तक नहीं लगी। जब तक आसपास मौजूद लोगों को स्थिति का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ग्रामीणों ने दौड़कर दोनों को पानी से बाहर निकाला, कोई छाती दबा रहा था, कोई मुंह से सांस देने की कोशिश कर रहा था… हर कोई उन्हें बचाने की जद्दोजहद में लगा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अस्पताल पहुंचते ही टूट गई उम्मीदें
बेतहाशा भागते हुए परिजन और ग्रामीण दोनों बच्चियों को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती पहुंचे। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजनों पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां की चीखें पूरे अस्पताल में गूंज उठीं, पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
गांव में पसरा सन्नाटा, हर घर में शोक
इस दर्दनाक हादसे के बाद लवसरा गांव में सन्नाटा पसर गया है। जिन आंगनों में कल तक दोनों बच्चियों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं। पूरे गांव के लोग इस हादसे से स्तब्ध हैं और हर कोई यही कह रहा है—काश! कोई समय रहते उन्हें बचा पाता।
एक चेतावनी भी…
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक चेतावनी है। जलस्रोतों के आसपास बच्चों की जरा-सी लापरवाही भी इतनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
मासूम किलकारियां अब हमेशा के लिए खामोश हो गईं… पीछे छोड़ गईं सिर्फ यादें और आंसू।




