फगुरम में सिंचित कृषि भूमि पर उद्योग स्थापना का विरोध तेज, तहसीलदार के रोक आदेश के बावजूद जारी निर्माण कार्य

फगुरम। ग्राम फगुरम की सिंचित कृषि भूमि पर प्रस्तावित उद्योग स्थापना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के विरोध और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार अड़भार द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाने के बाद भी संबंधित पक्ष द्वारा लगातार निर्माण कराया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना होने की चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम फगुरम, तहसील अड़भार, जिला सक्ती स्थित खसरा नंबर 824/2 की भूमि पर उद्योग स्थापना की प्रक्रिया शुरू किए जाने का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि पूरी तरह सिंचित कृषि भूमि है, जहां वर्षों से धान की खेती होती आ रही है। साथ ही आसपास बड़ी संख्या में किसानों की खेती योग्य जमीन और शासकीय नहर भी स्थित है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे आवेदन में आशंका जताई है कि उद्योग स्थापित होने से क्षेत्र की कृषि व्यवस्था, सिंचाई व्यवस्था और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे किसानों की आजीविका संकट में पड़ सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार अड़भार ने हल्का पटवारी क्रमांक 15 को मौके की जांच कर पंचनामा सहित विस्तृत प्रतिवेदन 20 मई 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि जांच और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका है। तहसीलदार द्वारा कार्य रोकने के निर्देश जारी किए जाने के बाद भी मौके पर लगातार गतिविधियां जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माणकर्ता के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह खुलेआम प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी कर रहा है।
ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की तो सिंचित कृषि भूमि को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने मांग की है कि निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए तथा आदेश की अवहेलना करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में भारी चर्चा का माहौल बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि आखिर तहसीलदार के आदेश की अवहेलना करने वालों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।




